Jharkhand News: झारखंड के खान एवं भूतत्व विभाग ने पिछले साल अप्रैल से सितंबर तक की अवधि के लिए अवैध खनन से संबंधित अपनी समेकित रिपोर्ट जारी की है. मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह खुलासा हुआ कि छह महीने के इस विशेष अभियान के दौरान राज्यभर में 3800 से अधिक औचक निरीक्षण किए गए. इस व्यापक कार्रवाई के तहत विभिन्न जिलों में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ 750 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और बड़ी मात्रा में खनिज जब्त किए गए हैं.
लाखों टन कोयला, बालू और पत्थर जब्त
विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पूरी कार्रवाई में कुल मिलाकर 1.54 लाख टन से अधिक अवैध खनिज जब्त किया गया है. इसमें सबसे बड़ी मात्रा बालू की रही, जिसका करीब 77302 टन हिस्सा जब्त किया गया है. इसके अलावा निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाला 62214 टन पत्थर और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा 14960 टन अवैध कोयला बरामद किया गया है. इस पूरी कार्रवाई के दौरान अवैध परिवहन में शामिल कुल 2675 वाहनों को भी रेल व जिला पुलिस के सहयोग से पकड़ा गया है.
कोयला और लघु खनिजों पर सबसे बड़ी चोट
वृहत खनिजों में सबसे अधिक सख्त कार्रवाई कोयला खनन क्षेत्रों में देखने को मिली, जहां अकेले कोयला क्षेत्र में 403 निरीक्षण किए गए. इस दौरान अवैध कोयला परिवहन में शामिल 139 वाहनों को जब्त किया गया और 134 एफआईआर दर्ज की गईं, जिसमें सबसे अधिक 48 एफआईआर धनबाद और 21 पाकुड़ में दर्ज हुई हैं. वहीं दूसरी ओर लघु खनिजों जैसे बालू और पत्थर के खिलाफ चले अभियान में 3300 से अधिक निरीक्षणों के बाद 665 एफआईआर दर्ज की गईं और 2542 वाहन जब्त किए गए.
जुर्माने के रूप में वसूला गया बड़ा राजस्व
इस कड़े प्रशासनिक अभियान का मुख्य उद्देश्य न केवल अवैध खनन को पूरी तरह से रोकना था, बल्कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना और सरकारी राजस्व की चोरी पर लगाम लगाना भी था. विभाग ने अवैध पत्थर के परिवहन से 562.35 लाख रुपये और अवैध बालू के परिवहन से 261.80 लाख रुपये की भारी जुर्माना राशि वसूल की है. रिपोर्ट के अनुसार लौह अयस्क की जांच केवल चाईबासा और सरायकेला-खरसावां जिलों में ही की गई, जहां कोई अवैध जब्ती नहीं हुई.