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  • 2026-05-18

International News: ग्वादर पोर्ट के बदले परमाणु पनडुब्बी चाहता था पाकिस्तान आखिर क्या थी आसिम मुनीर की चीन से खतरनाक डील

International News: पाकिस्तान और चीन के रिश्तों को लेकर एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है. दावा किया गया है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने साल 2024 में चीन से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम पनडुब्बियों की मांग की थी. इसके बदले पाकिस्तान चीन को ग्वादर पोर्ट को स्थायी नौसैनिक अड्डे की तरह इस्तेमाल करने की अनुमति देने को तैयार था. अगर यह डील हो जाती, तो दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन पर बड़ा असर पड़ सकता था.
आखिर क्या थी पाकिस्तान की पूरी योजना
अमेरिकी स्वतंत्र न्यूज आउटलेट ड्रॉप साइट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान इस डील के जरिए अपनी परमाणु ताकत को एक नए स्तर पर ले जाना चाहता था. पाकिस्तान की कोशिश थी कि उसे ऐसी परमाणु पनडुब्बियां मिलें जो समुद्र में लंबे समय तक छिपकर रह सकें और जरूरत पड़ने पर जवाबी परमाणु हमला कर सकें.
रणनीतिक भाषा में इसे सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी कहा जाता है. इसका मतलब यह होता है कि अगर किसी दुश्मन देश ने पहले हमला करके जमीन और हवा में मौजूद परमाणु ठिकानों को तबाह भी कर दिया, तब भी समुद्र में छिपी पनडुब्बियां जवाबी हमला करने में सक्षम रहें. यानी पाकिस्तान अपनी परमाणु सुरक्षा को और मजबूत बनाना चाहता था ताकि किसी भी युद्ध की स्थिति में उसकी जवाबी क्षमता खत्म न हो.

न्यूक्लियर ट्रायड पूरा करने की कोशिश में था पाकिस्तान
अभी पाकिस्तान के पास जमीन और हवा से परमाणु हमला करने की क्षमता मौजूद मानी जाती है. लेकिन समुद्र के जरिए परमाणु हमला करने की ताकत उसके पास नहीं है. अगर चीन पाकिस्तान को ऐसी परमाणु पनडुब्बियां दे देता, तो पाकिस्तान न्यूक्लियर ट्रायड पूरा करने वाले देशों की सूची में शामिल हो सकता था. न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब होता है जल, थल और वायु तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने की क्षमता. दुनिया में अभी बेहद कम देशों के पास यह क्षमता है. अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत जैसे देशों के पास ही ऐसी एडवांस परमाणु सैन्य ताकत मौजूद है.

ग्वादर पोर्ट क्यों है इतना महत्वपूर्ण
इस पूरे मामले में ग्वादर पोर्ट सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है. पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC का बड़ा हिस्सा है. यह पोर्ट अरब सागर के बेहद रणनीतिक इलाके में स्थित है. चीन पहले से ही हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में अगर उसे ग्वादर पोर्ट पर स्थायी नौसैनिक पहुंच मिल जाती, तो यह चीन के लिए सैन्य और व्यापारिक दोनों नजरिए से बड़ा फायदा होता.
विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्वादर पोर्ट चीन के लिए भविष्य में हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ाने का मजबूत आधार बन सकता है.

आखिर चीन ने डील को आगे क्यों नहीं बढ़ाया
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने पाकिस्तान की इस मांग को बहुत ज्यादा माना और इस पर आगे बातचीत नहीं बढ़ाई. माना जा रहा है कि परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी देना एक बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा फैसला होता. चीन पहले से ही पाकिस्तान का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार माना जाता है. पाकिस्तान की सैन्य तकनीक, हथियार और कई परमाणु परियोजनाओं में चीन की भूमिका पहले से चर्चा में रही है. इसके बावजूद चीन ने इस मामले में सावधानी दिखाई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसी डील सामने आती, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन को भारी आलोचना और दबाव का सामना करना पड़ सकता था.

पाकिस्तान और चीन के रिश्ते पहले से रहे हैं गहरे
चीन और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग कोई नई बात नहीं है. दोनों देशों के रिश्ते कई दशकों पुराने हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 1970 और 1980 के दशक में चीन ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को तकनीकी मदद दी थी. इसके अलावा मिसाइल तकनीक और सैन्य उपकरणों को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग की खबरें समय समय पर सामने आती रही हैं. हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने चीन से हैंगोर क्लास पनडुब्बियां भी हासिल की हैं. हालांकि इन्हें परमाणु हथियार ले जाने वाली पनडुब्बियां नहीं माना जाता.

अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में पाकिस्तान
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ चीन के साथ अपनी पुरानी रणनीतिक साझेदारी भी बनाए रखना चाहता है. इसी वजह से पाकिस्तान लगातार दोनों बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की नीति अपनाता नजर आता है. हालांकि ग्वादर पोर्ट और परमाणु पनडुब्बियों जैसी चर्चाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आने वाले समय में दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति किस दिशा में जाएगी.

क्यों चिंता बढ़ा सकती है यह खबर
अगर पाकिस्तान को परमाणु हथियार ले जाने वाली पनडुब्बियां मिल जातीं, तो इससे पूरे क्षेत्र में रणनीतिक तनाव काफी बढ़ सकता था. समुद्र में छिपी रहने वाली परमाणु पनडुब्बियों को ट्रैक करना बेहद मुश्किल माना जाता है. यही वजह है कि इन्हें किसी भी देश की सबसे खतरनाक सैन्य ताकतों में गिना जाता है. यही कारण है कि इस कथित डील को सिर्फ पाकिस्तान और चीन के रिश्तों तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे एशिया और दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
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