Jharkhand News: झारखंड में बालू संकट को कम करने और निर्माण कार्यों को रफ्तार देने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने बालू घाटों के संचालन की प्रक्रिया तेज कर दी है. विभाग मानसून और एनजीटी की संभावित रोक से पहले अधिक से अधिक बालू घाट चालू कराने की कोशिश में जुटा है. इसी दिशा में अब तक राज्य के 9 बालू घाटों के लिए संबंधित जिलों के उपायुक्तों द्वारा लीज डीड पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं.
राज्य में 444 बालू घाट चिन्हित, 299 घाटों की हो चुकी है नीलामी
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में कुल 444 बालू घाट चिन्हित किए गए हैं. इनमें से 299 घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 145 घाटों की नीलामी अभी लंबित है. फिलहाल राज्य के 35 बालू घाटों को पर्यावरणीय मंजूरी यानी ईसी मिल चुकी है. इनमें से 9 घाटों का लीज एग्रीमेंट पूरा कर संचालन की दिशा में आगे बढ़ा दिया गया है.
गोड्डा जिले में कई बालू घाटों और स्टॉकयार्ड को संचालन प्रक्रिया में किया गया शामिल
गोड्डा जिले में राहा बालू घाट और झिलुआ बालू घाट का लीज एग्रीमेंट पूरा कर लिया गया है. इसके अलावा लोचनी, राजोन कला और मखनी स्टॉकयार्ड को भी संचालन प्रक्रिया में शामिल किया गया है. विभाग का कहना है कि इन घाटों के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और लोगों को राहत मिलेगी.
जामताड़ा और रांची में भी लीज प्रक्रिया में आई तेजी
जामताड़ा जिले के आसनचुआ बालू घाट के लिए लीज डीड निष्पादित की गई है. वहीं जिले के अमलाचातर और बांकेट बालू घाट को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल चुकी है. रांची जिले में श्यामनगर बालू घाट और चोकसेरेंग बालू डिपॉजिट का एग्रीमेंट पूरा कर लिया गया है. इसके साथ ही गरिहालमद स्टॉकयार्ड को भी संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है.
बोकारो और पूर्वी सिंहभूम के घाट भी संचालन की दिशा में आगे बढ़े
बोकारो जिले के पिचरी 2 बालू घाट और खेतको चालकारी बालू क्षेत्र का लीज एग्रीमेंट पूरा किया गया है. खेतको स्टॉकयार्ड को भी स्वीकृति मिल चुकी है. वहीं पूर्वी सिंहभूम जिले में जमशेदपुर क्षेत्र के कोरेयामोहनपाल और सुवर्णरेखा नदी क्षेत्र से जुड़े बालू घाटों को भी संचालन प्रक्रिया में शामिल किया गया है.
10 जिलों के 35 बालू घाटों को मिल चुकी है पर्यावरणीय स्वीकृति
खान विभाग के अनुसार दुमका, खूंटी, जामताड़ा, हजारीबाग, रांची, बोकारो, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़ और लातेहार जिलों के कुल 35 बालू घाटों को पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान की जा चुकी है. इन घाटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 192.99 हेक्टेयर बताया गया है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिन घाटों को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल चुकी है, वहां संचालन शुरू कराने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है.
मानसून से पहले अधिक से अधिक घाट चालू करने पर विभाग का फोकस
विभाग का लक्ष्य मानसून शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा बालू घाटों को चालू करना है. अधिकारियों का मानना है कि इससे राज्य में बालू की उपलब्धता बेहतर होगी और निर्माण कार्यों पर असर नहीं पड़ेगा. इसी को देखते हुए सभी जिलों के उपायुक्तों को लीज निष्पादन और संचालन प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है. विभाग लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि बालू घाटों का संचालन समय पर शुरू हो सके.