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  • 2026-05-22

Tata Steel GST Case: टाटा स्टील को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 890 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट विवाद में विभागीय कार्रवाई पर लगाई रोक

Tata Steel GST Case: देश की दिग्गज स्टील उत्पादक कंपनी टाटा स्टील को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े एक बड़े टैक्स विवाद में देश की सर्वोच्च अदालत से बहुत बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने जमशेदपुर सीजीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त कार्यालय द्वारा कंपनी के खिलाफ की जा रही सभी प्रकार की दंडात्मक और विभागीय कार्रवाइयों पर अगली सुनवाई तक पूरी तरह से रोक (स्टे) लगा दी है. टाटा स्टील प्रबंधन ने इस महत्वपूर्ण कानूनी राहत के संबंध में शेयर बाजार नियामक "सेबी" (SEBI) को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया है.

गलत क्लेम के आरोप में विभाग ने लगाया था भारी जुर्माना
यह पूरा विवाद केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग द्वारा जून 2025 में जारी किए गए एक कारण बताओ नोटिस से शुरू हुआ था. विभाग का आरोप था कि टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2018-19 से लेकर 2020-21 के बीच नियमों का उल्लंघन कर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया है. इस मामले में टैक्स अथॉरिटी ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए 890.52 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाने का आदेश दिया था. इसके साथ ही, विभाग ने इतनी ही राशि यानी 890.52 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना और उस पर ब्याज भी थोप दिया था, जिससे कुल देय राशि दोगुनी हो गई थी.

हाई कोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची कंपनी
जमशेदपुर सीजीएसटी के इस कड़े आदेश के खिलाफ टाटा स्टील ने सबसे पहले झारखंड हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी. हालांकि, अप्रैल 2026 में हाई कोर्ट ने कंपनी को सीधे कोई राहत देने के बजाय जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल (GSTAT) या संबंधित वैधानिक अथॉरिटी के पास जाने की छूट देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया था. इसके बाद कंपनी ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की.

नियमों के तहत कैरी फॉरवर्ड किया था इनपुट टैक्स क्रेडिट
सुप्रीम कोर्ट में 19 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने विपक्षी दलों को नोटिस जारी करते हुए मामले के अंतिम निपटारे तक पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी. कंपनी प्रबंधन ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि टाटा स्टील ने नियमों के विरुद्ध कोई गलत क्रेडिट नहीं लिया है. प्रबंधन के मुताबिक, यह पूरा विवाद केवल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि एक वित्तीय वर्ष के वैध इनपुट टैक्स क्रेडिट को जीएसटी नियमों के तहत तकनीकी रूप से अगले वित्तीय वर्ष में क्लेम (कैरी फॉरवर्ड) किया गया था, जिसे विभाग ने गलत समझ लिया.
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