Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-05-22

Jamshedpur News: राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन में बोले विधायक सरयू राय- "स्वर्णरेखा समेत कई नदियों की स्थिति चिंताजनक, अतिक्रमण और प्रदूषण ने बिगाड़ा स्वरूप"


सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नदियों और पहाड़ों के संरक्षण, संवर्द्धन और सुरक्षा के लिए देश में अलग और प्रभावी कानून बनाने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को आगे बढ़ाना है।

“प्रकृति का दोहन नहीं, शोषण हो रहा है” : राजेंद्र सिंह
मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और जलपुरुष के नाम से प्रसिद्ध Rajendra Singh ने कहा कि पिछले 77 वर्षों में देश में कई पर्यावरण कानून बने, लेकिन नदियों और पहाड़ों को बचाने के लिए अब तक प्रभावी कानून नहीं बन पाया। उन्होंने कहा कि आज प्रकृति का सिर्फ दोहन नहीं बल्कि शोषण हो रहा है और इसकी कोई सीमा तय नहीं है।

उन्होंने अथर्ववेद का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों वर्ष पहले भी प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया था। उन्होंने कहा कि जो पृथ्वी को कष्ट देता है, प्रकृति अंततः उसे नष्ट कर देती है। राजेंद्र सिंह ने लोगों से प्रकृति संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।

उन्होंने कहा कि अरावली समेत कई पर्वत लगातार काटे जा रहे हैं और नदियां प्रदूषण का शिकार हो रही हैं। अगर पानी बचाना है तो पहाड़ों को बचाना होगा और इसके लिए मजबूत कानून बनाना जरूरी है।

संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. गोपाला गौड़ा ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश में नदियों और पहाड़ों के लिए अलग कानून नहीं बन पाया है। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इस दिशा में पहल करने की अपील की। साथ ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर नदी और पर्वत संरक्षण कानून बनाने की मांग की।

स्वर्णरेखा समेत कई नदियों की स्थिति चिंताजनक : सरयू राय
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि स्वर्णरेखा समेत कई नदियों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले लोगों का नदियों से भावनात्मक जुड़ाव था, लेकिन अब प्रदूषण और अतिक्रमण ने नदियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि नदी और पर्वत संरक्षण को लेकर कानून का एक प्रारूप तैयार किया गया है, जिसमें विशेषज्ञों के सुझाव शामिल किए जाएंगे।

“नदियां संसाधन नहीं, मां के समान”
पर्यावरणविद Dinesh Mishra ने कहा कि नदियों को सिर्फ संसाधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार छेड़छाड़ और अतिक्रमण के कारण नदियों की स्थिति बिगड़ती जा रही है।

जल बिरादरी के राष्ट्रीय संयोजक Bolishetty Satyanarayana ने कहा कि अगर पहाड़ खत्म हो गए तो बारिश और जल स्रोत भी समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने युवाओं से प्रकृति संरक्षण आंदोलन से जुड़ने की अपील की। वहीं IIT ISM Dhanbad के मिशनY के संयोजक प्रोफेसर अंशुमाली ने कहा कि दामोदर नदी की लंबाई में भारी कमी आई है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

तकनीकी सत्र में भी कानून बनाने पर जोर
सम्मेलन के तकनीकी सत्र में कई विशेषज्ञों ने नदी और पर्वत संरक्षण के लिए अलग कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा पर्यावरण कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है और निगरानी एजेंसियां भी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं। सम्मेलन में 300 से अधिक डेलीगेट्स शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान खरकई नदी पर लिखी गई एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन का दूसरा और अंतिम दिन 23 मई को आयोजित होगा।
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !