देशभर की ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे प्रशासन अलर्ट मोड पर है। हाल ही में सामने आए एक मामले में ट्रेनों में घूमते हुए ऐसे हॉकर पकड़े गए हैं, जो आईआरसीटीसी के फर्जी आई-कार्ड के सहारे खानपान सामग्री बेचते पाए गए। विशेषकर मुंबई मार्ग की ट्रेनों से ऐसे फर्जी हॉकरों की पहचान हुई है, जिन्होंने नकली हस्ताक्षर और दस्तावेजों से तैयार आई-कार्ड के सहारे वेंडिंग की गतिविधियां संचालित की।
इस गंभीर मामले के प्रकाश में आने के बाद रेलवे ने सभी जोनों में औचक जांच अभियान शुरू कर दिया है। चक्रधरपुर रेल मंडल के निर्देश पर टाटानगर स्टेशन पर कैटरिंग इंस्पेक्टर और आरपीएफ की टीमों ने हावड़ा, चांडिल और राउरकेला से आने-जाने वाली ट्रेनों की पेंट्रीकार व कोच में घूमने वाले हॉकरों के आई-कार्ड की जांच की।
हालांकि, टाटानगर स्टेशन पर दिनभर चली जांच में किसी भी फर्जी हॉकर की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन रेलवे की सतर्कता बरकरार है और जांच अभियान जारी है। रेलवे मुख्यालय ने सभी डिवीजनों से जांच रिपोर्ट तलब की है।
जानकारी के अनुसार, यात्रियों को स्टेशन पर लगातार घोषणा कर अधिकृत वेंडर से ही खानपान सामग्री खरीदने की सलाह दी जा रही है। परंतु वर्दी पहने होने के कारण यात्री अक्सर फर्जी हॉकरों की पहचान नहीं कर पाते।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल माह में आरपीएफ ने इगतपुरी सेक्शन में विशेष अभियान चलाकर 36 फर्जी हॉकरों को पकड़ा था। इनके पास से जो आई-कार्ड मिले थे, वे दो खानपान एजेंसियों के नाम से थे, लेकिन उनमें आईआरसीटीसी अधिकारियों के नकली हस्ताक्षर पाए गए। साथ ही ये हॉकर किसी भी अधिकृत एजेंसी से जुड़े नहीं थे।
रेलवे अब पेंट्रीकार में कार्यरत सभी वेंडरों के दस्तावेजों का कड़ाई से सत्यापन कर रहा है और फर्जी पहचान वाले हॉकरों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। यात्रियों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति की सूचना रेलवे या आरपीएफ को तुरंत दें।