Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची समेत कई इलाकों में लगातार घंटों बिजली कटौती से लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली संकट को लेकर अब सियासत भी तेज हो गई है. भाजपा नेता और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.
“राजधानी में ब्लैकआउट जैसे हालात”
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में कहा कि राजधानी रांची में लगातार घंटों बिजली कटौती के कारण ब्लैकआउट जैसे हालात बन गए हैं. उन्होंने लिखा कि भीषण गर्मी और उमस के बीच आम लोगों का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है. घरों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और अस्पतालों में मरीज भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि रातभर बिजली नहीं रहने से लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो गई है और अंधेरे का फायदा उठाकर अपराध और असामाजिक गतिविधियों की आशंका भी बढ़ रही है.
“जनता अंधेरे में, सरकार चैन की नींद में”
भाजपा नेता ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता टैक्स इसलिए देती है ताकि उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिल सकें, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि आम लोग अंधेरे और गर्मी में परेशान हैं, जबकि मुख्यमंत्री और सरकार के शीर्ष अधिकारी जनरेटर की सुविधा में चैन की नींद सो रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को x पर टैग करते हुए लिखा "कुछ तो शर्म करिये... " "बिजली विभाग आपसे नहीं संभल रहा तो अपने किसी योग्य अनुभवी विधायक को ऊर्जा मंत्री बनाईए और पूरे प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करिए".
सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ बढ़ा गुस्सा
रांची और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा देखने को मिल रहा है. कई लोगों ने बिजली व्यवस्था को बदहाल बताते हुए सरकार और बिजली विभाग से तत्काल समाधान की मांग की है. भीषण गर्मी के बीच लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से पानी की सप्लाई, इंटरनेट सेवाएं और छोटे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं. वहीं विपक्ष लगातार इसे सरकार की विफलता बता रहा है.
भाजपा ने सरकार को घेरा
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में भाजपा के कई बड़े नेताओं और पार्टी संगठनों को भी टैग किया. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भाजपा राज्य में बिजली संकट को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकती है.