Bengal Politics: कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के शांतिनिकेतन स्थित आवास को लेकर नया विवाद सामने आया है. कोलकाता पुलिस की एक विशेष टीम के अचानक हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास पर पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब कोलकाता नगर निगम द्वारा अवैध निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया गया था.
अवैध निर्माण के आरोपों के बाद नगर निगम की कार्रवाई
जानकारी के अनुसार 188ए हरीश मुखर्जी रोड स्थित आवास के एक हिस्से में अवैध निर्माण को लेकर आरोप लगाए गए हैं. इसी आधार पर कोलकाता नगर निगम की ओर से अभिषेक बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा गया था. नगर निगम का कहना है कि नियमों के खिलाफ बने हिस्से को लेकर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए. इस मामले में आगे बढ़ते हुए यह भी बताया जा रहा है कि संबंधित अवैध हिस्से को हटाने का आदेश भी जारी किया गया है. इसी प्रक्रिया के तहत प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
पुलिस टीम के पहुंचने से बढ़ी हलचल, मौके पर लिया गया जायजा
इसी बीच कोलकाता पुलिस की एक विशेष टीम के मौके पर पहुंचने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है. टीम ने आवास पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने की कोशिश की. पुलिस के इस दौरे को लेकर अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. सूत्रों के अनुसार शुरू में यह माना जा रहा है कि पुलिस की यह मौजूदगी नगर निगम के नोटिस और आदेश से जुड़ी हुई हो सकती है. हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर अभी तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है कि यह कार्रवाई किस आधार पर की गई.
अभिषेक बनर्जी ने मांगा 14 दिन का समय, जवाब पत्र भेजा
इस पूरे मामले में एक नया घटनाक्रम भी सामने आया है. बताया जा रहा है कि नगर निगम के नोटिस के जवाब में अभिषेक बनर्जी ने एक प्रतिपत्र भेजा है. इस पत्र में उन्होंने आगे की कार्रवाई के लिए दो सप्ताह यानी 14 दिन का अतिरिक्त समय मांगा है. उनकी ओर से कहा गया है कि उन्हें इस मामले में आवश्यक कदम उठाने के लिए समय दिया जाए ताकि उचित प्रक्रिया के तहत स्थिति को संभाला जा सके.
प्रशासनिक चुप्पी से बढ़े सवाल, जांच पर उठ रहे प्रश्न
नगर निगम के नोटिस और समय सीमा को लेकर पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी और अब पुलिस के पहुंचने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस केवल स्थिति का जायजा लेने पहुंची थी या फिर यह किसी विशेष रिपोर्ट या आदेश के तहत की गई कार्रवाई थी. फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं दी गई है, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया है. राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर नजरें टिकी हुई हैं और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है.