News 26 IMPACT: झारखंड में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा-पान मसाला पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पीछे नीतिगत सख्ती और जमीनी चुनौतियों की एक लंबी कहानी है. दरअसल, "न्यूज़ 26 झारखंड" के एक स्टिंग ऑपरेशन में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि राज्य में सरकारी रोक के दावों के बावजूद जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में गुटखा सिंडिकेट पूरी तरह सक्रिय है. इस जमीनी हकीकत के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने "खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006" की धारा 30(2)(a) के तहत राज्य में इन उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए पूर्ण प्रतिबंध का औपचारिक आदेश जारी किया था. इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, कागजी दावों को धरातल पर उतारने और नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान (झारखंड) के निर्देश पर आज 26 मई से 26 जून तक पूरे सूबे में एक महीने के विशेष महाअभियान की शुरुआत की जा रही है, जिसके तहत बाजारों में व्यापक छापेमारी की जाएगी.
सप्लाई चेन को रोकने में तंत्र प्रभावी नहीं, शहरों में लगे होर्डिंग्स पर उठ रहे सवाल
विभागीय आदेशों और पूर्व में लिए गए फैसलों के बावजूद जमीनी स्तर पर राज्य का पुलिस और प्रशासनिक तंत्र इस अवैध धंधे की मुख्य सप्लाई चेन और सिंडिकेट को पूरी तरह से तोड़ने में अब तक प्रभावी साबित नहीं हो सका है. यही कारण है कि पूर्ण प्रतिबंध के दावों के बाद भी यह कारोबार सुचारू रूप से संचालित हो रहा है. इस नीतिगत ढिलाई का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण जमशेदपुर सहित राज्य के विभिन्न बड़े शहरों में देखने को मिलता है, जहां प्रतिबंधित पान मसाला ब्रांड्स के बड़े-बड़े विज्ञापन और होर्डिंग्स मुख्य सड़कों पर खुलेआम लगे हुए हैं. यह स्थिति प्रशासनिक मुस्तैदी और सरकार के अपने ही तय दिशा-निर्देशों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है कि जब उत्पाद ही बैन है, तो फिर विज्ञापन के जरिए इसे प्रमोट करने की खुली छूट किसने दी?
स्वास्थ्य मंत्री के दावों की समीक्षा, पहले चरण में जागरूकता और जांच पर रहेगा जोर
इस प्रशासनिक सुस्ती ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा 19 फरवरी 2025 को किए गए उन दावों की व्यावहारिक सफलता को भी समीक्षा के दायरे में ला दिया है, जिसमें उन्होंने राज्य को तंबाकू मुक्त बनाने का संकल्प साझा किया था. वर्तमान कार्ययोजना के अनुसार, इस एक महीने के अभियान के पहले चरण में (26 मई से 30 मई तक) सार्वजनिक स्थानों पर कोटपा एक्ट (COTPA) के तहत जागरूकता पोस्टर लगाए जाएंगे. इसके साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में नो स्मोकिंग जोन के बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू की अवैध बिक्री के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाया जाएगा.
31 मई को तंबाकू निषेध दिवस पर शपथ, जून में ग्रामीण क्षेत्रों और स्कूलों में कड़ाई
आगामी 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सभी सरकारी दफ्तरों, स्वास्थ्य केंद्रों और पुलिस थानों में अधिकारियों व कर्मचारियों को तंबाकू सेवन न करने की शपथ दिलाई जाएगी. इसके बाद, 2 से 6 जून तक जिला स्तरीय तंबाकू नियंत्रण समितियों की समीक्षा बैठकें होंगी, जबकि 10 से 17 जून तक ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. अभियान के अंतिम चरण में (18 से 26 जून तक) सभी स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में पीली रेखा (Yellow Line) अंकित कर तंबाकू उत्पादों की बिक्री को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाएगा. नियमों की अवहेलना करने वाले दुकानदारों और सप्लायरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सीधे जेल भेजने और भारी जुर्माने का दंडात्मक प्रावधान तय किया गया है.
नीतियों की घोषणा और जमीनी क्रियान्वयन की चुनौतियां
झारखंड सरकार का यह एक महीने का महाअभियान जन-स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से एक सराहनीय कदम है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता केवल कागजी आदेशों से इतर व्यावहारिक और निष्पक्ष क्रियान्वयन पर निर्भर करती है. पूर्व में भी ऐसे कई अल्पावधि अभियान चलाए जा चुके हैं, जिनका असर समय के साथ धीमा पड़ गया.
एक तरफ प्रशासनिक स्तर पर स्कूलों के बाहर पीली रेखा खींचने और जागरूकता फैलाने का खाका तैयार किया गया है, वहीं दूसरी तरफ शहरों के व्यावसायिक केंद्रों में सजे प्रतिबंधित उत्पादों के बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड्स पर कोई सीधी कार्रवाई न होना नीतिगत विरोधाभास को दर्शाता है. जब तक राज्य पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग मिलकर खुदरा विक्रेताओं के साथ-साथ इस अवैध कारोबार के मुख्य सप्लायरों और सिंडिकेट के शीर्ष पर बैठे लोगों के खिलाफ कठोर एवं निरंतर कानूनी कार्रवाई नहीं करते, तब तक राज्य को पूरी तरह तंबाकू और नशामुक्त बनाना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा.