Ranchi News: दिल्ली में आयोजित जनजातीय संस्कृति समागम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज को वनवासी कहे जाने के विरोध में मंगलवार को रांची में विभिन्न आदिवासी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचकर अमित शाह का पुतला दहन किया और बयान के खिलाफ नाराजगी जताई. इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज से जुड़े लोग मौजूद रहे.
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला विरोध मार्च
प्रदर्शन से पहले अलग अलग आदिवासी संगठनों के लोग जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए. यहां से सभी ने पैदल मार्च निकाला. यह मार्च शहीद चौक होते हुए अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा, जहां सभा आयोजित कर विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारेबाजी भी की और आदिवासी पहचान को लेकर अपनी बात मजबूती से रखी.
आदिवासी पहचान और संस्कृति को कमजोर करने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज को वनवासी कहना उनकी मूल पहचान, संस्कृति और परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय की अपनी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है.
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज को उसकी मूल पहचान से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही समुदाय को अलग अलग वर्गों में बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब भी सरना धर्म कोड की मांग उठती है तब सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने से बचती नजर आती है.
कई आदिवासी संगठनों के नेता रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, आदिवासी जनपरिषद के अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा, अभय भुटकुंवर, लक्ष्मी नारायण मुंडा और प्रवीण कच्छप समेत कई सामाजिक और आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों को लेकर लगातार आवाज उठाता रहेगा और किसी भी तरह की टिप्पणी को स्वीकार नहीं करेगा जो उनकी अस्मिता को प्रभावित करती हो.
धर्मशाला में खेले गए इस मुकाबले ने जहां क्रिकेट फैंस को रोमांच से भर दिया, वहीं लेजर शो के दौरान दिखाई गई इस बड़ी गलती ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. अब लोग इस मामले में आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं.