Jharkhand News: झारखंड में लघु खनिज समानुदान नियमावली (जेएमएमसी रूल) में किए गए संशोधन का असर अब राज्य की बड़ी विकास परियोजनाओं पर दिखने लगा है. पथ निर्माण, भवन निर्माण और जल संसाधन विभाग समेत कई योजनाओं के कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि करीब 5000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं इस बदलाव से प्रभावित हुई हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है, जो पूरे विषय की समीक्षा करेगी.
जानकारी के मुताबिक सरकार ने जेएमएमसी नियमावली की धारा 15 को समाप्त कर दिया है. पहले निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को खनिज से जुड़े वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर रॉयल्टी की दोगुनी राशि जमा करनी पड़ती थी. अब नई व्यवस्था के तहत निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाले बालू, पत्थर, मिट्टी और मोरम जैसे लघु खनिजों के लिए वैध ई-चालान प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है. बिना ई-चालान के भुगतान पर रोक लगा दी गई है.
नए नियम लागू होने के बाद विभिन्न विभागों के कार्यपालक अभियंताओं ने भी संबंधित आदेश जारी कर दिए हैं. इसमें स्पष्ट कहा गया है कि आवश्यक ई-चालान उपलब्ध नहीं कराने वाले ठेकेदारों के बिल का भुगतान नहीं किया जाएगा. इस कारण कई निर्माण परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है.
उधर बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपा है. एसोसिएशन का कहना है कि कई बार तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से समय पर ई-चालान उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे रनिंग बिल अटक रहे हैं और परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं.
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि पहले से बढ़ी निर्माण सामग्री और ईंधन की लागत के बीच भुगतान में देरी से ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ रहा है. उनका मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो कई विकास कार्यों की गति थम सकती है.