ED Big Action: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी अनवर ढेबर और अन्य आरोपियों से जुड़ी 1000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अटैच किया है। जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2019 से 2023 के बीच एक संगठित शराब सिंडिकेट ने उत्पाद शुल्क प्रणाली में कथित हेरफेर कर 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की थी।
झारखंड में भी लागू कराया गया था कथित छत्तीसगढ़ मॉडल
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि अनवर ढेबर के निर्देश पर झारखंड में भी छत्तीसगढ़ की तर्ज पर नई उत्पाद नीति लागू कराई गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक, शराब सिंडिकेट से जुड़े कई आरोपियों ने पीएमएलए की धारा-50 के तहत दर्ज अपने बयानों में इस संबंध में जानकारी दी है। झारखंड शराब घोटाले की जांच कर रही एसीबी ने भी 17 दिसंबर 2025 को रायपुर जेल में बंद अनवर ढेबर से पूछताछ की थी।
अधिकारियों और सिंडिकेट के बीच समन्वय का दावा
ईडी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में झारखंड में लागू नई उत्पाद नीति के दौरान तत्कालीन अधिकारियों और छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के बीच करीबी समन्वय था। जांच में यह भी सामने आया कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एपी त्रिपाठी को सलाहकार के रूप में जोड़ा गया था, जिन्हें सिंडिकेट का समर्थन प्राप्त था।
खरीद दरों में हेरफेर और कमीशनखोरी के आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि अनवर ढेबर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की अगुवाई में संचालित इस सिंडिकेट में वरिष्ठ अधिकारी, डिस्टिलरी संचालक और निजी कंपनियां शामिल थीं। शराब की खरीद दरों में कथित हेरफेर, अवैध शराब निर्माण और एफएल-10ए लाइसेंस जारी करने के बदले भारी कमीशन वसूला गया था।
रायपुर की जमीनें और प्लॉट किए गए कुर्क
ईडी कोर्ट के आदेश पर विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी कई अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। इनमें रायपुर स्थित ढेबर सिटी होम्स के प्लॉट और विभिन्न शेल कंपनियों के नाम पर दर्ज जमीनें शामिल हैं। ईडी का दावा है कि विकास अग्रवाल सिंडिकेट के वित्तीय प्रबंधक के रूप में काम करता था और कमीशन की रकम अनवर ढेबर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता था।
गोवा का लग्जरी होटल भी ईडी के निशाने पर
एक अन्य आदेश के तहत गोवा के अंजुना गांव स्थित प्रीमियम होटल वेस्टिन गोवा को भी कुर्क किया गया है। ईडी का आरोप है कि इस होटल की खरीद में लगभग 110 करोड़ रुपये की अवैध नकदी का इस्तेमाल किया गया था, जिसका संबंध कथित शराब घोटाले से अर्जित रकम से है।
कंपनियों के बैंक खाते और निवेश भी अटैच
ईडी ने तीन प्रमुख एफएल-10ए लाइसेंसधारी कंपनियों ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड, डिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड भी अटैच किए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया जाता था।
छत्तीसगढ़ और झारखंड कनेक्शन पर फिर बढ़ी चर्चा
ईडी की इस कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ और झारखंड से जुड़े कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी और अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कदम उठाए जाएंगे।