Varanasi Airport Drug Bust: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के एक नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. कस्टम अधिकारियों ने थाईलैंड के छह नागरिकों को भारी मात्रा में हाइड्रोपोनिक गांजे के साथ गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं. बरामद नशीले पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 19 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है.
बैंकॉक से वाराणसी पहुंचे थे सभी आरोपी
कस्टम और पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई शनिवार रात को की गई थी. सभी आरोपी बैंकॉक से एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान से वाराणसी पहुंचे थे. एयरपोर्ट पर नियमित जांच और स्क्रीनिंग के दौरान अधिकारियों को यात्रियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उन्हें रोककर विस्तृत जांच की गई.
ट्रॉली बैग से मिला करीब 20 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा
संदेह के आधार पर जब अधिकारियों ने आरोपियों के ट्रॉली बैग की तलाशी ली तो उनके पास से 19.7 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद हुआ. जांच में सामने आया कि तस्करों ने प्रतिबंधित नशीले पदार्थ को छिपाने के लिए विशेष तरीके से पैक किए गए प्लास्टिक पैकेटों का इस्तेमाल किया था ताकि सुरक्षा जांच के दौरान शक न हो.
पूछताछ में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
गिरफ्तारी के बाद कस्टम अधिकारियों और जांच एजेंसियों ने आरोपियों से गहन पूछताछ की. पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं. आरोपियों ने स्वीकार किया कि यह भारत में उनकी पहली तस्करी की कोशिश नहीं थी. उन्होंने जांच टीम को बताया कि इससे पहले भी वे अलग अलग मार्गों का इस्तेमाल कर देश में नशीले पदार्थों की खेप पहुंचा चुके हैं.
कोलकाता और गया के रास्ते भी पहुंचा चुके हैं ड्रग्स
जांच के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पहले भी कोलकाता और गया के रास्ते भारत में ड्रग्स की तस्करी कर चुके हैं. इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां अब उनके नेटवर्क और भारत में मौजूद संभावित संपर्कों की पड़ताल में जुट गई हैं. अधिकारियों को आशंका है कि इस मामले के तार एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं.
वाराणसी एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है. एक ओर जहां करोड़ों रुपये मूल्य का हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया है, वहीं आरोपियों के खुलासों ने जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं. अब एजेंसियों का फोकस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने पर है.