जल योजनाओं की प्रगति और लंबित राशि का मुद्दा उठा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि वर्ष 2019 से राज्य में करीब 24,635 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है. इसके तहत मल्टी विलेज स्कीम और सिंगल विलेज स्कीम पर विशेष ध्यान दिया गया है.
उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन केंद्र की ओर से केवल 46 प्रतिशत अनुदान ही प्राप्त हुआ है. राज्य ने करीब 6,500 करोड़ रुपये की लंबित केंद्रीय सहायता जल्द जारी करने की मांग की.
परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने में होने वाली देरी से कई परियोजनाएं प्रभावित होती हैं. ऐसे में योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक मंजूरियां जल्द उपलब्ध कराने की जरूरत है.
उन्होंने सिंगल विलेज स्कीम के स्थायी संचालन पर भी जोर दिया. राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक गांव में जल सहिया की तैनाती की गई है, जिन्हें 2,500 रुपये प्रतिमाह सहायता दी जा रही है. इसके लिए केंद्र से सहयोग की अपेक्षा जताई गई.
केंद्र ने संचालन और रखरखाव पर अपना रुख किया साफ
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्पष्ट किया कि रेट्रोफिटिंग तथा नियमित संचालन और रखरखाव कार्यों के लिए केंद्र सरकार अलग से वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराएगी. उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए 16वें वित्त आयोग के तहत पंचायती राज संस्थानों को मिलने वाले अनुदान का उपयोग किया जा सकता है.
झारखंड को 2,500 करोड़ रुपये का विशेष आवंटन
बैठक में झारखंड के लिए 2,500 करोड़ रुपये के विशेष आवंटन की जानकारी दी गई. साथ ही राज्य को जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया ताकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत धनराशि जारी की जा सके.
जिलाधिकारियों को परियोजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए. वहीं 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं की उच्च स्तर पर समीक्षा करने का फैसला लिया गया. बैठक में 1,400 करोड़ रुपये की अनुचित लागत वाले ओवरसाइज्ड घटकों की भी जांच करने का निर्देश दिया गया.
हर ग्रामीण परिवार तक नल से जल पहुंचाने पर जोर
बैठक के अंत में मिशन से जुड़े दिशा निर्देशों को तेजी से लागू करने और लंबित परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया गया. केंद्र और राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई.