RIMS Ranchi: रिम्स प्रबंधन ने बिरहोर बच्चे की मौत के मामले में जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। यह टीम इस मामले में सभी बिंदुओं पर जांच करेगी और एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेगी। टीम में नियोनेटल के विभागाध्यक्ष, सेंट्रल इमरजेंसी के विभागाध्यक्ष और उपाधीक्षक-2 शामिल हैं।
कुछ दिन पहले एमजीएम अस्मताल जमशेदपुर से चार दिन के बिरहोर बच्चे को इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया था। लेकिन यहां इलाज शुरू होने से पहले ही बच्चे की मौत हो गई। इस मामले में परिजनों का आरोप है कि इलाज शुरू करने में लापरवाही बरती गई।
रिम्स प्रबंधन ने अपनी सफाई में कहा है कि एमजीएम के डॉक्टरों ने बच्चे को जल्दी रिम्स पहुंचाने को कहा था। लेकिन 108 एंबुलेंस रास्ते में रुकती रही और ड्राइवर ने बिना ऑक्सीजन के बच्चे को चौथे तल पर पहुंचाया। शिशु इमरजेंसी पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चे की जांच शुरू की, लेकिन उसे मृत घोषित कर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है और रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। विभाग के संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग आदिवासी हितों के प्रति सदैव सजग है और किसी भी प्रकार की उपेक्षा सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।
अब देखना यह है कि जांच टीम क्या रिपोर्ट सौंपती है और क्या कार्रवाई की जाती है। यह मामला आदिवासी समुदाय के प्रति स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी को उजागर करता है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
रिम्स में बिरहोर बच्चे की मौत का मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या स्वास्थ्य विभाग आदिवासी समुदाय के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा पाता है।