मुंबई की घटना के बाद तेज हुई कार्रवाई
हाल ही में मुंबई में एक वड़ा पाव विक्रेता को अखबार में खाना पैक करते हुए पकड़ा गया था. इसके बाद FSSAI के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त अभियान शुरू किया. अधिकारियों का कहना है कि ऐसी पुरानी और असुरक्षित प्रथाओं को रोकने के लिए निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ाई जाएंगी.
गर्म और तैलीय भोजन के साथ बढ़ जाता है खतरा
FSSAI के मुताबिक अखबारों में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग स्याही में कई तरह के रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं. इनमें कुछ ऐसे पदार्थ भी शामिल हो सकते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हैं. जब गर्म या तेलयुक्त भोजन सीधे अखबार के संपर्क में आता है तो ये तत्व खाने में मिल सकते हैं. लंबे समय तक ऐसा भोजन खाने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है.
गंदे अखबारों से भोजन तक पहुंच सकते हैं बैक्टीरिया
नियामक ने यह भी बताया कि अखबार छपाई से लेकर वितरण तक कई अलग अलग जगहों से गुजरते हैं. इस दौरान उन पर धूल, गंदगी और कई तरह के रोगाणु जमा हो सकते हैं. ऐसे अखबारों में खाना परोसने पर बैक्टीरिया सीधे भोजन तक पहुंच सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
सभी फूड कारोबारियों को नियम मानने का निर्देश
FSSAI ने दोहराया है कि खाद्य सुरक्षा और मानक नियम 2018 के तहत अखबार में खाना लपेटना या परोसना प्रतिबंधित है. यह नियम स्ट्रीट फूड विक्रेताओं, रेस्तरां, क्लाउड किचन, कैटरिंग सेवाओं और मोबाइल फूड वेंडर्स समेत सभी खाद्य व्यवसायों पर लागू होता है. सभी को केवल फूड ग्रेड पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है.
ग्राहकों से भी की गई विशेष अपील
प्राधिकरण ने लोगों से भी सतर्क रहने को कहा है. ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अखबार में परोसा या पैक किया गया भोजन लेने से बचें और सुरक्षित पैकेजिंग वाले खाद्य पदार्थों को ही प्राथमिकता दें.
खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार और नियामक एजेंसियां लगातार सख्ती बरत रही हैं. FSSAI का कहना है कि सुरक्षित भोजन केवल अच्छी गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों से ही नहीं, बल्कि सुरक्षित पैकेजिंग से भी जुड़ा है. ऐसे में अखबार में खाना परोसने की पुरानी आदत अब स्वास्थ्य और नियम दोनों के लिहाज से छोड़ना जरूरी हो गया है.