Justice GS Patel Threat Case: बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जीएस पटेल और उनके परिवार से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. पिछले करीब दस महीनों से उन्हें लगातार धमकियां मिलने, संदिग्ध घटनाओं का सामना करने और परिवार के सदस्यों को निशाना बनाए जाने के आरोप सामने आए हैं. हाल ही में लंदन में उनकी बेटी को एक गुमनाम धमकी भरा पत्र मिलने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है. अब भारत और ब्रिटेन की एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हैं.
लंदन में बेटी को मिला धमकी भरा पत्र, साथ भेजा गया संदिग्ध एसडी कार्ड
मामले का सबसे ताजा घटनाक्रम 5 जून को सामने आया. लंदन में रहने वाली जस्टिस जीएस पटेल की बेटी अदिति पटेल को डाक के जरिए एक गुमनाम पत्र मिला. पत्र में परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी और कुछ मांगें पूरी नहीं होने पर नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई थी.
चिंता की बात यह रही कि पत्र के साथ एक एसडी कार्ड भी भेजा गया था. परिवार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे किसी भी मोबाइल, कंप्यूटर या अन्य डिवाइस में नहीं चलाया. उन्हें आशंका थी कि इसमें कोई हानिकारक सॉफ्टवेयर हो सकता है. बाद में एसडी कार्ड और पत्र दोनों ब्रिटेन की पुलिस को सौंप दिए गए, जिसने जांच शुरू कर दी है.
जर्मनी से कनेक्शन की आशंका, ब्रिटेन की पुलिस कर रही जांच
प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई गई है कि पत्र जर्मनी से भेजा गया हो सकता है. लिफाफे पर जर्मनी का डाक टिकट लगा हुआ था, जबकि प्रेषक के रूप में लंदन का जो पता दर्ज था, उसे संदिग्ध और संभवतः फर्जी माना जा रहा है.
इस पूरे मामले की जांच ब्रिटेन की हर्टफोर्डशायर पुलिस कर रही है. वहीं भारतीय अधिकारियों और संबंधित संस्थानों को भी मामले की जानकारी दे दी गई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पत्र भेजने के पीछे कौन लोग हैं और उनका उद्देश्य क्या था.
फैसले को वापस लेने का दबाव बनाने की कोशिश का आरोप
जीएस पटेल का कहना है कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी लगातार दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है. उनके मुताबिक उनसे एक यूट्यूब वीडियो जारी कर अपने न्यायिक फैसले को वापस लेने या बदलने जैसी मांगें की जा रही हैं.
उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी अदालत के फैसले को सोशल मीडिया वीडियो के जरिए बदला नहीं जा सकता. यदि किसी पक्ष को न्यायिक आदेश से आपत्ति है तो उसके लिए कानूनी रास्ते उपलब्ध हैं और उसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.
जस्टिस पटेल ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग, बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और भारत के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचा दी है.
धमकियों की शुरुआत पिछले साल हुई थी
परिवार के मुताबिक यह सिलसिला अगस्त 2024 से शुरू हुआ था. सबसे पहले उनकी पत्नी मालाश्री पटेल को मुंबई स्थित आवास पर एक धमकी भरा पत्र मिला था. इसी दौरान लंदन में रहने वाली उनकी बेटी अदिति पटेल को भी इसी तरह का पत्र भेजा गया.
बताया जाता है कि उन पत्रों में लंदन स्थित उनके घर में हुई कथित सेंधमारी की जिम्मेदारी लेने का दावा भी किया गया था. इसके बाद परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती चली गईं.
बेटी पर हमले के बाद मामला और गंभीर हुआ
परिवार का कहना है कि केवल धमकियां ही नहीं दी गईं, बल्कि इस साल अप्रैल में अदिति पटेल पर हमला भी हुआ. 22 अप्रैल को जब वह स्कूल जा रही थीं, तभी एक नकाबपोश व्यक्ति ने पीछे से उन पर हमला कर दिया.
इस हमले में उनकी नाक टूट गई और उन्हें गंभीर चोटें आईं. इस घटना की जांच वेस्ट हर्टफोर्डशायर की काउंटर टेररिज्म यूनिट कर रही है. जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या इस हमले और धमकी भरे पत्रों के बीच कोई संबंध है.
दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद से जुड़ा बताया जा रहा पूरा मामला
जानकारों के अनुसार यह पूरा विवाद दाऊदी बोहरा समुदाय के लंबे समय से चल रहे उत्तराधिकार मामले से जुड़ा हुआ है. वर्ष 2014 में 52वें आध्यात्मिक प्रमुख सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद नेतृत्व को लेकर विवाद शुरू हुआ था.
एक पक्ष ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को 53वें दाई अल मुतलक के रूप में स्वीकार किया, जबकि दूसरे पक्ष ने इस दावे को चुनौती दी. मामला वर्षों तक बॉम्बे हाई कोर्ट में चला और देश के चर्चित धार्मिक एवं कानूनी विवादों में शामिल रहा.
ऐतिहासिक फैसले के बाद बढ़ा विवाद
23 अप्रैल 2024 को जस्टिस जीएस पटेल ने इस मामले में फैसला सुनाया था. उन्होंने ताहिर फखरुद्दीन गुट की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि वैकल्पिक दावे के समर्थन में पर्याप्त और भरोसेमंद साक्ष्य पेश नहीं किए गए हैं.
अदालत ने अपने फैसले में सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय का वैध 53वां दाई अल मुतलक माना था. माना जा रहा है कि इसके बाद से ही विवाद ने नया मोड़ लिया.
फखरुद्दीन गुट ने हिंसा और धमकियों से किया किनारा
इस मामले में ताहिर फखरुद्दीन के भाई और उनके संचार निदेशक अजीज भाईसाहब कुतुबुद्दीन ने किसी भी तरह की हिंसा और धमकी की निंदा की है. उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं अपील प्रक्रिया को प्रभावित करने और उनके पक्ष की छवि खराब करने की कोशिश भी हो सकती हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की धमकी या हिंसक कार्रवाई का समर्थन नहीं किया जा सकता.
भारत और ब्रिटेन की एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती
जस्टिस पटेल का मानना है कि धमकियां और घटनाएं काफी सुनियोजित तरीके से अंजाम दी जा रही हैं. उनका कहना है कि इसमें अलग अलग देशों के अधिकार क्षेत्रों का फायदा उठाने की कोशिश दिखाई देती है, जिससे जांच और कानूनी कार्रवाई जटिल हो जाती है.