Jamshedpur News: पर्यावरण संरक्षण के साथ मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से जमशेदपुर वन प्रमंडल ने इस वर्ष पौधारोपण अभियान को नई दिशा दी है. मानसून के दौरान वन प्रमंडल क्षेत्र में करीब छह लाख पौधे लगाए जाएंगे. खास बात यह है कि पहली बार पौधारोपण योजना में हाथियों के पसंदीदा भोजन वाले पौधों को प्राथमिकता दी गई है, ताकि भोजन की तलाश में हाथियों का रिहायशी इलाकों की ओर रुख कम हो सके.
वन विभाग का मानना है कि जंगलों में प्राकृतिक खाद्य स्रोत बढ़ने से हाथियों को उनके आवास क्षेत्र में ही भोजन उपलब्ध होगा. इससे फसलों की बर्बादी, संपत्ति नुकसान और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है.
जमशेदपुर वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) सबा आलम अंसारी ने बताया कि दलमा और आसपास के वन क्षेत्रों में अक्सर हाथियों के गांवों में प्रवेश करने की घटनाएं सामने आती हैं. इसके पीछे जंगलों में भोजन की उपलब्धता में कमी भी एक बड़ा कारण है. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पौधारोपण अभियान को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ा गया है.
बांस, बरगद, पीपल और फलदार पौधों पर रहेगा जोर
वन विभाग के अनुसार इस अभियान के तहत बांस, बरगद, पीपल, जामुन, कटहल, आम समेत कई फलदार और छायादार प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे. ये पौधे हाथियों के प्राकृतिक भोजन का हिस्सा माने जाते हैं.
विभाग का कहना है कि आने वाले वर्षों में जब ये पौधे बड़े होंगे तो जंगलों के भीतर ही हाथियों को पर्याप्त भोजन मिल सकेगा. इससे उनके गांवों की ओर आने की संभावना कम होगी.
जैव विविधता को भी मिलेगा फायदा
क्षेत्रीय वन संरक्षक स्मिता पंकज ने कहा कि स्थानीय और फलदार प्रजातियों के पौधे सिर्फ हाथियों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों, बंदरों, हिरणों और अन्य वन्यजीवों के लिए भी लाभदायक होंगे. इससे जंगलों की जैव विविधता मजबूत होगी और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षण मिलेगा.
उन्होंने बताया कि इस वर्ष जमशेदपुर वन प्रमंडल में अलग-अलग प्रजातियों के छह लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. पहली बार पौधों के चयन में हाथियों की भोजन जरूरत को ध्यान में रखा गया है.
डीएफओ सबा आलम अंसारी ने कहा कि वन विभाग का प्रयास है कि जंगलों में प्राकृतिक खाद्य स्रोत बढ़ाए जाएं, ताकि हाथियों को भोजन के लिए गांवों की ओर न जाना पड़े और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके.