Seraikela News: दिल्ली के होटल और बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद सार्वजनिक भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. इन घटनाओं के बाद न्यूज 26 झारखंड ने सरायकेला-खरसावां जिले के होटल और अस्पतालों में आग से बचाव की तैयारियों की पड़ताल की, जिसमें कई जगह व्यवस्थाओं को लेकर चिंता सामने आई.
जिले के पुराने होटलों में अग्निशमन यंत्र तो लगे मिले, लेकिन आपात स्थिति में उनकी वास्तविक उपयोगिता और कर्मचारियों की तैयारी को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी. कई जगह फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद हैं, लेकिन उनके नियमित रखरखाव, एक्सपायरी जांच और इस्तेमाल की ट्रेनिंग को लेकर सवाल बने हुए हैं.
नए होटलों में आधुनिक सिस्टम, लेकिन मॉक ड्रिल की कमी
वहीं, हाल के वर्षों में बने नए होटलों में फायर सेफ्टी को लेकर आधुनिक इंतजाम किए गए हैं. होटल प्रबंधन के अनुसार कई भवनों में स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए गए हैं.
प्रबंधन का दावा है कि धुआं या आग की स्थिति में अलार्म सिस्टम तुरंत सक्रिय होकर लोगों को सतर्क कर देगा, जिससे समय रहते निकासी की जा सकेगी.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सुरक्षा उपकरण लगा देना पर्याप्त नहीं है. किसी भी सिस्टम की असली परीक्षा आपात स्थिति में होती है. इसके लिए नियमित मॉक ड्रिल और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना जरूरी है.
अस्पतालों में भी सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूरी
अस्पतालों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही नजर आई. कई अस्पतालों में अग्निशमन यंत्र मौजूद हैं, लेकिन नियमित जांच, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी.
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था सबसे ज्यादा मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि यहां मरीजों की स्थिति ऐसी होती है कि वे खुद तुरंत बाहर नहीं निकल सकते. ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के लिए इमरजेंसी प्लान और नियमित अभ्यास बेहद जरूरी है.
सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए तैयारी
दिल्ली और मुजफ्फरपुर की घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि आग जैसी आपदा कभी भी और कहीं भी हो सकती है. ऐसे में सरायकेला-खरसावां के होटल और अस्पतालों में सिर्फ फायर उपकरण रखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनकी नियमित जांच और वास्तविक अभ्यास भी जरूरी है.
अब बड़ा सवाल यही है कि जिले के होटल और अस्पताल अग्नि सुरक्षा को लेकर कितने तैयार हैं और संबंधित विभाग इन व्यवस्थाओं की निगरानी कितनी गंभीरता से कर रहे हैं.