Health News: बढ़ती उम्र के साथ आंखों से जुड़ी कई परेशानियां सामने आने लगती हैं, जिनमें मोतियाबिंद एक आम समस्या है. इस बीमारी में आंख के अंदर मौजूद प्राकृतिक लेंस धीरे-धीरे अपनी पारदर्शिता खोने लगता है, जिससे देखने की क्षमता प्रभावित होती है.
विशेषज्ञों के अनुसार 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में मोतियाबिंद होने की संभावना ज्यादा रहती है. हालांकि कुछ अन्य कारणों से भी यह समस्या कम उम्र में विकसित हो सकती है. मधुमेह से पीड़ित लोगों, आंख में चोट लगने, धूम्रपान करने वालों और लंबे समय तक तेज धूप में रहने वाले लोगों में इसका खतरा बढ़ सकता है.
मोतियाबिंद के शुरुआती संकेतों में चीजों का धुंधला नजर आना, रात के समय देखने में परेशानी होना, तेज रोशनी सहन न होना और रंगों की चमक कम महसूस होना शामिल है. कई लोगों में समय के साथ चश्मे का नंबर भी बार-बार बदलने लगता है.
डॉक्टरों का कहना है कि मोतियाबिंद को दवाओं से पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता. इसका प्रभावी उपचार ऑपरेशन ही है. वर्तमान समय में फेको सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीक से आंख के खराब लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस लगाया जाता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर आंखों की जांच और सही इलाज कराने से मरीज दोबारा सामान्य दृष्टि पा सकते हैं. बुजुर्गों को नजर में बदलाव महसूस होने पर इसे उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और नियमित नेत्र जांच करानी चाहिए.