Bengal Politics: तृणमूल कांग्रेस के असंतुष्ट सांसदों का एक महत्वपूर्ण जमावड़ा रविवार शाम दिल्ली में होने जा रहा है. डिनर बैठक के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम को बंगाल की राजनीति और संसद में आगे की रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी इस बैठक में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. उनके पहले दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों में बदलाव के कारण उनका दौरा टल गया है.
शुभेंदु अधिकारी की गैरमौजूदगी के बावजूद उनके करीबी नेताओं की मौजूदगी पर सबकी नजर
सूत्रों के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी की अनुपस्थिति के बावजूद उनके संपर्क में माने जाने वाले कई बागी सांसद इस बैठक में शामिल रहेंगे. ऐसे में माना जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली यह मुलाकात आगे की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
संसद के भीतर नई पहचान और बैठने की व्यवस्था को लेकर बन सकती है रणनीति
जानकारी के अनुसार, बैठक में संसद के आगामी सत्र और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी. बागी नेताओं का एक समूह जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की तैयारी में है. माना जा रहा है कि यह समूह संसद में खुद को अलग पहचान देने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ बैठने की अनुमति हासिल करने के विकल्पों पर भी विचार कर सकता है.
इन 19 नेताओं के नामों को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज
तृणमूल कांग्रेस के जिन नेताओं के नाम बागी खेमे से जोड़कर देखे जा रहे हैं, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, डॉ शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर्रहमान, अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान, मिताली बैग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक के नाम शामिल बताए जा रहे हैं.
महुआ मोइत्रा की टिप्पणी से सियासी बहस को मिला नया मोड़
इसी बीच टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय पर सोशल मीडिया के जरिए सवाल खड़े किए हैं. महुआ मोइत्रा का आरोप है कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी थी, लेकिन बाद में उनकी मौजूदगी दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ देखी गई. इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
दिल्ली में हो रही बागी सांसदों की यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं मानी जा रही है. संसद के भीतर नई रणनीति, अलग पहचान और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं. शुभेंदु अधिकारी की गैरमौजूदगी के बावजूद बागी खेमे की सक्रियता ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है.