Jharkhand News: झारखंड पुलिस के हजारों सिपाही और समकक्ष कर्मियों के लिए झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस कर्मियों को ACP/MACP का लाभ देने में सरकार की ओर से लगाई गई अतिरिक्त शर्त लागू नहीं होगी.
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद झारखंड पुलिस के करीब 60 से 70 हजार कर्मियों को राहत मिलने की उम्मीद है. इसमें सिपाही, हवलदार और उनके समकक्ष पदों पर कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं.
दरअसल, राज्य सरकार ने ACP/MACP का लाभ देने के लिए यह शर्त रखी थी कि कर्मियों को 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पूरी करने के साथ-साथ निर्धारित ट्रेनिंग की शर्त भी पूरी करनी होगी. इसी शर्त को लेकर विवाद खड़ा हुआ था.
इस मामले में झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन ने 16 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सुनवाई के बाद अदालत ने एसोसिएशन के पक्ष में फैसला दिया था और कर्मियों को लाभ देने का रास्ता साफ किया था.
इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दाखिल की थी. मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश एसएम सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार की अपील पर सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सरकार की ओर से अपील दाखिल करने में काफी देरी हुई है. कोर्ट ने कहा कि करीब 450 दिनों बाद दाखिल की गई अपील को स्वीकार करने का कोई उचित आधार नहीं है.
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा. अब पुलिस कर्मियों को ACP/MACP लाभ मिलने में ट्रेनिंग वाली अतिरिक्त बाध्यता नहीं रहेगी.
हाईकोर्ट के इस फैसले को झारखंड पुलिस के जवानों के लिए बड़ी प्रशासनिक और वित्तीय राहत के रूप में देखा जा रहा है.