US Iran Peace Deal: कई महीनों से जारी तनाव और टकराव के दौर के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी के संकेत मिले हैं. दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने एक समझौते पर हस्ताक्षर कर नए सिरे से भरोसा बहाल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. इस समझौते को फिलहाल शुरुआती ढांचे के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने की उम्मीद बढ़ी है.
फ्रांस में हुई औपचारिक प्रक्रिया, जिनेवा में होगी अगली अहम बातचीत
समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया फ्रांस के वर्साय पैलेस में पूरी हुई, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस पर अपनी सहमति जता चुके थे. अब शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें इस व्यवस्था को स्थायी रूप देने पर चर्चा की जाएगी.
अगले 60 दिन रहेंगे अहम, दोनों पक्षों को बरतना होगा संयम
समझौते के तहत आने वाले 60 दिनों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस दौरान दोनों देशों को ऐसे किसी भी सैन्य, आर्थिक या राजनीतिक कदम से बचना होगा, जिससे आपसी भरोसे पर असर पड़े. अधिकारियों का मानना है कि यही अवधि आगे की बातचीत और स्थायी समाधान की दिशा तय करेगी. हालांकि अमेरिकी प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह अभी शुरुआती चरण का समझौता है और शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में दोनों पक्ष अपने फैसले पर पुनर्विचार भी कर सकते हैं.
तेल कारोबार और रुकी संपत्तियों को लेकर ईरान को मिली राहत
समझौते के बाद ईरान को आर्थिक मोर्चे पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के अनुसार अब तेहरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल निर्यात करने में पहले जैसी बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा. साथ ही अमेरिका ने उन संपत्तियों तक पहुंच बहाल करने का भरोसा दिया है, जो लंबे समय से प्रतिबंधों के कारण रुकी हुई थीं. ईरान की कोशिश है कि तेल से होने वाली आय सीधे उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सके.