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  • 2026-06-20

Jharkhand News: खूंटी में हाथियों का कहर, किसान का पांच क्विंटल धान किया साफ, गांव में बढ़ी चिंता

Jharkhand News: खूंटी जिले में जंगली हाथियों की आवाजाही एक बार फिर ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है. कर्रा प्रखंड के चिद्दी गांव स्थित कोन्हप्पा टोला में शनिवार तड़के हाथियों के झुंड ने एक किसान की फसल को नुकसान पहुंचा दिया. हाथियों ने करीब पांच क्विंटल धान खा लिया, जबकि बाकी धान भी बिखरकर खराब हो गया. घटना के बाद गांव के लोगों में डर का माहौल है.
देर रात गांव पहुंचे हाथी, डर के कारण घरों से बाहर नहीं निकले लोग
ग्रामीणों के मुताबिक, घटना सुबह होने से पहले करीब तीन बजे की है. किसान लक्ष्मण उरांव ने धान का ढेर सड़क के पास रखा था. इसी बीच हाथियों का झुंड वहां पहुंच गया. रात में कुत्तों के लगातार भौंकने से लोगों को कुछ अनहोनी का अंदेशा हुआ, लेकिन हाथियों के भय से कोई भी घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर सका.


सुबह उजागर हुआ नुकसान, किसान को उठाना पड़ा आर्थिक झटका
दिन निकलने के बाद जब लोग बाहर निकले तो धान बिखरा पड़ा मिला. ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों ने बड़ी मात्रा में धान खा लिया और बची हुई फसल को भी नुकसान पहुंचाया. इस घटना से किसान लक्ष्मण उरांव को आर्थिक नुकसान हुआ है. गांव के लोगों का कहना है कि खेती ही उनकी आय का मुख्य सहारा है और ऐसी घटनाएं परिवारों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं.


वन विभाग से सुरक्षा और मुआवजे की मांग, विशेष निगरानी की उठी आवाज
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर नजर बढ़ाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में बिजली व्यवस्था बेहतर की जाए और समय रहते हाथियों की मौजूदगी की जानकारी दी जाए. ग्रामीणों ने टॉर्च, पटाखे समेत जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की भी मांग की है, ताकि हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखा जा सके.


ग्रामीणों ने प्रभावित किसान को मुआवजा देने और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाने की मांग भी की है. उनका कहना है कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में जानमाल के नुकसान का खतरा और बढ़ सकता है. खूंटी समेत झारखंड के कई इलाकों में मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ता संघर्ष प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. ऐसे में लोगों को उम्मीद है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएंगे.
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