Ranchi News : खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड में बड़ी संख्या में गैर-कोयला खदानें बंद या निष्क्रिय पड़ी हैं। राज्य की कुल 85 गैर-कोयला खनन लीज में से फिलहाल केवल 36 खदानों में ही खनन कार्य जारी है, जबकि 49 खदानें विभिन्न कारणों से बंद हैं। इससे खनन गतिविधियों, सरकारी राजस्व, स्थानीय रोजगार और औद्योगिक विकास पर असर पड़ रहा है।
लीज समाप्त होने और स्वीकृतियों में देरी बनी बड़ी वजह
सरकारी आंकड़ों के अनुसार कई खनन लीज की अवधि समाप्त हो चुकी है। अब तक केवल 11 खदानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो पाई है, जबकि 20 नए खनन ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं। हालांकि अधिकांश ब्लॉकों में अभी तक खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण और वन स्वीकृतियों में देरी, नीलामी प्रक्रिया का लंबा खिंचना और प्रशासनिक बाधाएं खदानों के बंद रहने के प्रमुख कारण हैं।
लौह अयस्क और बॉक्साइट खदानें सबसे अधिक प्रभावित
सबसे अधिक असर लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर और ग्रेफाइट की खदानों पर देखा जा रहा है। पश्चिमी सिंहभूम में लौह अयस्क की 15 लीज में से केवल 6 खदानें संचालित हैं। वहीं गुमला और लोहरदगा के बॉक्साइट क्षेत्रों में 37 लीज होने के बावजूद सिर्फ 17 खदानों में ही खनन कार्य जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य अपनी खनिज क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है और बंद खदानों को दोबारा शुरू करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
झारखंड में कुल 85 गैर-कोयला खनन लीज हैं, जिनमें से वर्तमान में केवल 36 खदानों में खनन कार्य संचालित हो रहा है, जबकि 49 खदानें बंद या निष्क्रिय पड़ी हैं। अब तक 11 खदानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहीं राज्य में 20 नए खनन ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश में अभी खनन कार्य शुरू नहीं हो सका है।