Ayodhya Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित हेराफेरी मामले की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. तीन सदस्यीय विशेष जांच दल ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में मामले में एफआईआर दर्ज करने और ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव से जुड़े अहम सुझाव दिए गए हैं. हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है.
शुरुआती रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें
सूत्रों के अनुसार जांच दल ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट एडिशनल चीफ सेक्रेटरी होम संजय प्रसाद को सौंपी है. लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने अन्य दो सदस्यों के साथ मिलकर यह रिपोर्ट प्रस्तुत की. रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं को देखते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है. इसके साथ ही ट्रस्ट के पुनर्गठन और किसी वरिष्ठ अधिकारी को मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है.
योगी सरकार के निर्देश पर बनी थी तीन सदस्यीय टीम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था. लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई में टीम ने अयोध्या में छह दिनों तक अलग अलग पहलुओं की बारीकी से जांच की. इस दौरान पांच दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की गई. इनमें मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, ट्रस्ट से जुड़े लोग और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल रहे. टीम ने चढ़ावे की गिनती, रखरखाव व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की भी समीक्षा की.
फंड में गड़बड़ी के आरोपों के बाद शुरू हुई थी जांच
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया था. मामले की संवेदनशीलता और करोड़ों लोगों की आस्था को देखते हुए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया था. इस टीम में विजय विश्वास पंत के अलावा पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है. जांच दल को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों को सामने लाने और आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.