Jamshedpur News: धनबाद रिंग रोड भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. करोड़ों रुपये के कथित मुआवजा घोटाले में गिरफ्तार 18 आरोपियों की ओर से दायर जमानत याचिकाओं पर न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत में सुनवाई की गई. हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से संतोषजनक और स्पष्ट जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार के लिए निर्धारित कर दी.
इस मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक विशाल कुमार सहित कुल 18 आरोपी अदालत से जमानत की मांग कर रहे हैं. सभी आरोपियों की ओर से हाईकोर्ट में अलग-अलग जमानत याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन पर सुनवाई जारी है. फिलहाल किसी भी आरोपी को राहत नहीं मिली है और अदालत ने मामले को अगले दिन के लिए सूचीबद्ध कर दिया है.
फर्जी रैयत बनाकर करोड़ों रुपये के मुआवजे का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार धनबाद रिंग रोड परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं. आरोप है कि वास्तविक भू-स्वामियों को दरकिनार कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और असली रैयतों की जगह अन्य लोगों के नाम पर करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी कर दिया गया. इस कथित हेराफेरी के जरिए सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया.
भू-माफिया, अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की जांच
जांच में यह आशंका भी जताई गई है कि पूरे खेल में भू-माफियाओं के साथ-साथ राजस्व विभाग के तत्कालीन अधिकारियों और कुछ सरकारी कर्मियों की मिलीभगत थी. इसी आधार पर कई लोगों को आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार तथा धोखाधड़ी से जुड़े विभिन्न आरोपों में कार्रवाई शुरू की गई.
एसीबी की जांच के बाद हुई थी गिरफ्तारी
मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), धनबाद कर रही है. जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर एसीबी ने कार्रवाई करते हुए इस वर्ष 9 जनवरी को सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था. तब से आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं.