Jharkhand News : झारखंड में चल रहे भूमि सर्वेक्षण कार्य को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पिछली सुनवाई में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, फिर विभागीय अवर सचिव ने शपथपत्र क्यों दाखिल किया? कोर्ट ने अब विभाग के सचिव को स्वयं 15 जुलाई तक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
भूमि सर्वे की समयसीमा बताने का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राजस्व सचिव को निर्देश दिया कि वह शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करें कि राज्य के सभी जिलों में भूमि सर्वे का कार्य कब तक पूरा होगा। साथ ही, यदि इस संबंध में कोई नया घटनाक्रम हुआ है तो उसकी जानकारी भी शपथपत्र में शामिल की जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याद दिलाया कि 17 जून 2025 को सरकार को नई तकनीक अपनाने की प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरी करने और उसके छह माह के भीतर पूरे राज्य में भूमि सर्वे का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि अब तक उसके आदेश का पालन नहीं हुआ है।
50 साल बाद भी अधूरा है भूमि सर्वे
महाधिवक्ता रोहित राय ने अदालत से समय की मांग करते हुए कहा कि विभागीय सचिव स्वयं शपथपत्र दाखिल करेंगे। इससे पहले सरकार ने कोर्ट को बताया था कि झारखंड में वर्तमान भूमि सर्वे तकनीक काफी पुरानी है। इसलिए केरल, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीक का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि पुराने रिकॉर्ड को डिजिटाइज कर सर्वे कार्य में तेजी लाई जा सके।
गौरतलब है कि झारखंड में भूमि सर्वेक्षण का कार्य वर्ष 1975 से शुरू हुआ था, लेकिन करीब 50 वर्ष बाद भी यह पूरा नहीं हो सका है। जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1932 के बाद राज्य में व्यवस्थित भूमि सर्वे नहीं हुआ। वहीं सरकार ने अदालत को बताया कि लातेहार और लोहरदगा समेत कुछ जिलों में सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष जिलों में प्रक्रिया जारी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समय पर भूमि सर्वे पूरा होने से आम लोगों की जमीन के साथ-साथ सरकारी भूमि की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।