Bharatiya Nyaya Sanhita: देश में एक जुलाई 2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानूनों के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) की जगह क्रमशः भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू किए गए. इन नए कानूनों के लागू होने के दो वर्ष पूरे होने के साथ कई अहम प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है.
नए कानूनों के तहत साइबर अपराध को संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है. इसके अलावा फिरौती, जमीन पर अवैध कब्जा और संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े अपराधों के लिए भी कड़े दंड का प्रावधान किया गया है.
आतंकवाद की पहली बार स्पष्ट परिभाषा
भारतीय न्याय संहिता (BNS) में पहली बार सामान्य आपराधिक कानून के तहत आतंकवाद को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. वहीं, पुराने राजद्रोह (Sedition) कानून को समाप्त कर उसकी जगह ऐसा नया प्रावधान लाया गया है, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में रखता है.
मॉब लिंचिंग और महिलाओं-बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्ती
नए कानूनों में मॉब लिंचिंग को अलग और गंभीर अपराध के रूप में शामिल किया गया है. ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए भी कई सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं, ताकि ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
डिजिटल जांच और तय समय-सीमा
न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए जांच और मुकदमों में डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया है. कई मामलों में जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की गई है, जिससे मामलों के लंबित रहने की समस्या कम हो सके.
छिनतई और छोटे अपराधों पर भी नए प्रावधान
नए कानूनों में पहली बार छिनतई (Snatching) को अलग अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है. वहीं, छोटे अपराधों में जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा (Community Service) का प्रावधान जोड़ा गया है. इसके तहत दोषी से सफाई अभियान, पौधारोपण या अन्य सामाजिक कार्य कराए जा सकते हैं, ताकि उसे सुधार का अवसर मिल सके.