Ranchi News : हिरासत में होने वाली मौतों की न्यायिक जांच समाप्त करने से जुड़े राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के एक सर्कुलर को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दायर याचिका में कहा गया है कि यह सर्कुलर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और पहले लागू दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के प्रावधानों के विपरीत है, क्योंकि कानून हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक जांच को अनिवार्य मानता है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि संबंधित सर्कुलर को निरस्त किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हिरासत में मौत के प्रत्येक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांच कराई जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में केवल कार्यपालिका स्तर की जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
हाईकोर्ट पहले भी जता चुका है चिंता
उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में हिरासत में हुई मौतों के मामलों में न्यायिक जांच नहीं होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने कहा था कि कानून के तहत हिरासत में मौत के मामलों में न्यायिक जांच अनिवार्य है और इसका पालन किया जाना चाहिए।
अब इस नई याचिका के जरिए एनएचआरसी के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसके प्रभाव को लेकर याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई है। मामले में हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।