Jharkhand High Court: झारखंड हाई कोर्ट के नए आदेश के बाद रांची चिड़ियाघर की रोजमर्रा की व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी. अदालत ने वन विभाग को योजना मद से रकम खर्च करने की छूट दे दी है. इससे जू में जानवरों के चारे, इलाज, रखरखाव और परिसर की सफाई जैसे जरूरी काम जारी रह सकेंगे.
हालांकि वन विभाग को पूरी राहत नहीं मिली है. गैर योजना मद से भुगतान पर पहले की तरह रोक जारी रखी गई है. इसका असर विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों पर पड़ेगा, क्योंकि उनके वेतन का भुगतान इसी मद से किया जाता है.
बकाया भुगतान विवाद में लगी थी रोक
यह मामला वन विभाग के सेवानिवृत्त रेंजर आनंद कुमार की याचिका से जुड़ा है. उन्होंने अपने बकाया भुगतान को लेकर हाई कोर्ट में मामला दायर किया था. सुनवाई के दौरान अदालत ने विभाग के दोनों वित्तीय मदों से राशि निकासी पर रोक लगा दी थी.
रोक लगने के बाद रांची जू के संचालन को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी. दैनिक जरूरतों के लिए भुगतान नहीं हो पाने से जानवरों के भोजन, देखभाल और अन्य व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका थी.
विभाग ने बताया क्यों जरूरी है योजना मद
वन विभाग ने कोर्ट के समक्ष हस्तक्षेप याचिका दायर कर योजना मद से निकासी की अनुमति मांगी. विभाग ने कहा कि इसी मद से जू के जानवरों का भोजन, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें, साफ-सफाई, पौधारोपण और दैनिक मजदूरों की मजदूरी दी जाती है.
विभाग ने यह भी दावा किया कि सेवानिवृत्त रेंजर आनंद कुमार के नाम पर कोई बकाया राशि लंबित नहीं है. इसके आधार पर योजना मद पर लगी रोक हटाने का आग्रह किया गया.
वेतन भुगतान के लिए अभी इंतजार
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने योजना मद से खर्च की अनुमति दे दी. इससे चिड़ियाघर के संचालन से जुड़ी आवश्यक गतिविधियों को राहत मिली है. दूसरी ओर गैर योजना मद पर रोक कायम रहने से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन के लिए अभी इंतजार करना होगा.