Jharkhand Forest Department: झारखंड वन विभाग ने वन प्रबंधन और वानिकी कार्यों में लगे दैनिक श्रमिकों की मजदूरी भुगतान के लिए 23 करोड़ 27 लाख रुपये से अधिक की राशि आवंटित की है. यह राशि वन प्रबंधन सुविधा योजना के तहत जारी की गई है. विभाग ने फंड जारी करने के साथ ही भुगतान और कार्यान्वयन से जुड़े नियमों को भी सख्त कर दिया है.
विभागीय आदेश में कहा गया है कि मजदूरी भुगतान में देरी, अनियमितता या भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. सरकार का उद्देश्य श्रमिकों को उनकी मेहनत का भुगतान समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना है.
नकद भुगतान नहीं होगा, सीधे खाते में जाएगी मजदूरी
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत किसी भी श्रमिक को नकद भुगतान नहीं किया जाएगा. मजदूरी की पूरी राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के बैंक या डाकघर खातों में भेजी जाएगी.
विभाग ने निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि एक ही कार्य के लिए अलग-अलग योजनाओं से भुगतान नहीं हो. कैंपा, पलामू व्याघ्र परियोजना, हाथी परियोजना या अन्य किसी योजना से एक ही काम के लिए राशि मिलने की स्थिति में भुगतान रोकना होगा.
तय मजदूरी दर के अनुसार होगा भुगतान
दैनिक श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग, झारखंड की अद्यतन दरों के अनुसार किया जाएगा. सामग्री, मशीनरी और उपकरणों की खरीद में भी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.
मशीनरी और उपकरणों की खरीद के लिए ई-जीईएम पोर्टल का उपयोग अनिवार्य किया गया है. विभाग ने कहा है कि कार्यों की गुणवत्ता और अधिकारियों की भूमिका की नियमित समीक्षा होगी. संतोषजनक कार्य नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सुधार की चेतावनी दी जाएगी.
सोशल ऑडिट और बाहरी मूल्यांकन भी होगा
योजना के पिछले तीन वर्षों का सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा. इसके बाद प्रत्येक वर्ष सोशल ऑडिट कराना अनिवार्य होगा. विभागीय रिपोर्ट के अलावा किसी प्रतिष्ठित संस्थान से तृतीय पक्ष मूल्यांकन भी कराया जाएगा.
सभी निकासी पदाधिकारियों को हर माह की 5 तारीख तक योजना की भौतिक और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट जमा करनी होगी. विभाग ने साफ किया है कि रिपोर्ट देने में देरी या गलत आंकड़े स्वीकार नहीं किए जाएंगे.