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  • 2026-07-04

BJP MLA Raju Singh: दिल्ली हर्ष फायरिंग केस में BJP विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की सजा

BJP MLA Raju Singh: दिल्ली के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में बिहार के साहेबगंज से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के मामले में उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-2 के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए चार वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जो मृतका के परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।



2018 के न्यू ईयर सेलिब्रेशन में चली थी गोली
यह मामला वर्ष 2018 में दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में आयोजित नववर्ष समारोह के दौरान हुई हर्ष फायरिंग से जुड़ा है। आरोप है कि समारोह में चलाई गई गोली अर्चना गुप्ता को लगी, जिससे उनकी मौत हो गई। अदालत ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर माना कि गोली राजू कुमार सिंह की ओर से चलाई गई थी। शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन के मामले में उन्हें दो माह की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है।

अदालत ने हर्ष फायरिंग पर जताई सख्त चिंता
6 जून को दिए गए अपने 97 पृष्ठों के फैसले में अदालत ने कहा था कि हर्ष फायरिंग एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है, जिसमें अक्सर निर्दोष लोगों की जान चली जाती है। सजा सुनाए जाने से पहले राजू कुमार सिंह ने प्रोबेशन पर रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उनका किसी की हत्या का इरादा नहीं था और उनका सार्वजनिक जीवन निष्कलंक रहा है। हालांकि अदालत ने उनकी दलील स्वीकार नहीं की।

विधानसभा सदस्यता पर भी मंडराया खतरा
चार वर्ष की सजा के बाद राजू कुमार सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी कानूनी संकट गहरा गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अनुसार यदि किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता अयोग्य घोषित की जा सकती है। यह प्रावधान 2013 में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रभावी हुआ था।

हाईकोर्ट से राहत मिली तो बच सकती है सदस्यता
अब राजू कुमार सिंह के पास उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प है। यदि उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगा देता है, तो उनकी विधानसभा सदस्यता बरकरार रह सकती है। हालांकि केवल जमानत मिलने या सजा पर रोक लगने से सदस्यता स्वतः सुरक्षित नहीं होगी। ऐसे में अब सभी की नजरें आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।
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