Jamshedpur News : बार संचालक हिमांशु सिंह हत्याकांड में नामजद आरोपी नीरज सिंह की ओर से अदालत में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश झा ने बताया कि इनमें से एक एडमिशन संबंधी याचिका पर 6 जुलाई (सोमवार) को सुनवाई होगी, जबकि दो अन्य याचिकाएं नीरज सिंह की पत्नी की ओर से दाखिल की गई हैं। इनमें पुलिस द्वारा बिना नोटिस और बिना जब्ती सूची (सीजर लिस्ट) के वाहनों को ले जाने तथा बिना वैधानिक प्रक्रिया के घर में प्रवेश करने को चुनौती दी गई है।
बिना सीजर लिस्ट गाड़ियां ले जाने पर कोर्ट पहुंचा मामला
प्रकाश झा ने बताया कि पुलिस कंपनी के नाम से पंजीकृत दो गाड़ियों को बिना किसी जब्ती सूची और नोटिस के अपने साथ ले गई। पुलिस ने केवल यह कहा कि जांच के बाद वाहन वापस कर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो कोई दस्तावेज उपलब्ध कराया गया और न ही अदालत को इसकी जानकारी दी गई। इस संबंध में अदालत में आवेदन देकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
घर में जबरन प्रवेश का भी आरोप
उन्होंने बताया कि दूसरी याचिका में आरोप लगाया गया है कि नीरज सिंह के घर, जहां उनकी पत्नी, 13 वर्षीय बेटी और एक घरेलू सहायिका रहती हैं, वहां पुलिस बिना किसी सर्च वारंट, नोटिस या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए प्रवेश कर गई और अलमारी समेत अन्य सामान की तलाशी ली। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को कानून के तहत जांच का अधिकार है, लेकिन कानून किसी के घर में बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए प्रवेश करने की अनुमति नहीं देता।
एफआईआर में नामजद, लेकिन भूमिका पर उठाए सवाल
प्रकाश झा ने कहा कि नीरज सिंह एफआईआर में नामजद आरोपी हैं, लेकिन प्राथमिकी पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि उनका नाम अंत में साजिश के आरोप के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने दावा किया कि एफआईआर के मुख्य हिस्से में घटना में नीरज सिंह की प्रत्यक्ष भूमिका का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। शिकायतकर्ता ने स्वयं यह कहा है कि यदि बार के कर्मचारियों ने संबंधित युवकों को बाहर नहीं निकाला होता तो घटना नहीं होती। अधिवक्ता के अनुसार, एफआईआर में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि नीरज सिंह ने घटना में कोई प्रत्यक्ष भूमिका निभाई।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि अदालत में दायर याचिकाओं के माध्यम से पुलिस की कार्रवाई की वैधता, जब्ती प्रक्रिया और तलाशी की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी, जहां अदालत इन याचिकाओं पर विचार करेगी।