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  • 2026-07-06

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने माओवादी फंडिंग मामले में आरोपी की जमानत याचिका की खारिज

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन से कथित संबंध और फंडिंग नेटवर्क से जुड़े मामले में आरोपी अभिनव उर्फ गौरव कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने एनआईए की विशेष अदालत के पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर साक्ष्य उपलब्ध हैं.

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने की. एनआईए की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरव कुमार ने पक्ष रखा.

पूरक आरोपपत्र और फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला
हाईकोर्ट ने कहा कि पूरक आरोपपत्र में आरोपी की कथित भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है. जांच के दौरान सह-आरोपियों के घरों में तलाशी के समय उसकी मौजूदगी दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है.

अदालत के अनुसार, सीएफएसएल कोलकाता की फोरेंसिक रिपोर्ट में कई जब्त दस्तावेजों की लिखावट आरोपी से मेल खाने की बात कही गई है. वॉयस क्लिप की जांच में भी आरोपी के मुख्य आरोपी तरुण कुमार और अन्य आरोपियों के संपर्क में रहने का संकेत मिला है.

केवल हथियार रखने का मामला नहीं: कोर्ट
खंडपीठ ने कहा कि मामला केवल हथियार रखने के आरोप तक सीमित नहीं है. आरोपी पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए धन जुटाने की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है.

अदालत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में केवल लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती.

आरोपी ने कहा- संदेह के आधार पर फंसाया गया
सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसे केवल संदेह के आधार पर मामले में फंसाया गया है. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सह-आरोपी आनंद पासवान को पहले ही जमानत मिल चुकी है.

अभिनव उर्फ गौरव कुमार 3 जनवरी 2023 से जेल में है. बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है.

NIA का दावा- फंडिंग नेटवर्क में सक्रिय भूमिका
एनआईए ने अदालत को बताया कि आरोपी कथित तौर पर माओवादी संगठन के फंडिंग नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था. एजेंसी के अनुसार, वह लेवी के जरिए धन जुटाने, संगठन के लिए संपर्क तैयार करने और पूर्व माओवादी कैडरों को फिर से नेटवर्क से जोड़ने में भूमिका निभाता था.

एनआईए का दावा है कि आरोपी बिहार और झारखंड के मगध-आम्रपाली क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के लिए संपर्क सूत्र के रूप में काम करता था. जांच एजेंसी के अनुसार, स्थानीय ठेकेदारों से कथित तौर पर जुटाई गई राशि का उपयोग नक्सली गतिविधियों के लिए किया जाना था.



76 गवाहों में 24 की गवाही बाकी
एनआईए ने अदालत को बताया कि मामले में कुल 76 गवाह हैं. इनमें से 24 गवाहों की गवाही अभी शेष है.
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