Finance Department Jharkhand: झारखंड सरकार ने जूनियर अधिकारियों को उनके ही वेतन पर सीनियर पद का स्वतंत्र प्रभार देने की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दी है. वित्त विभाग ने मुख्यमंत्री की सहमति के बाद इस संबंध में तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि झारखंड सेवा संहिता में जूनियर अधिकारी को सीनियर पद का स्वतंत्र प्रभार देने का कोई प्रावधान नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फैसला
सरकार ने यह बड़ा कदम सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद उठाया है. अदालत ने आदेश दिया था कि यदि किसी जूनियर से सीनियर पद का काम लिया जाता है, तो उसे दोनों पदों के वेतन का अंतर (एरियर) देना होगा. राज्य सरकार ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. भविष्य में ऐसे वित्तीय और कानूनी विवादों से बचने के लिए सरकार ने यह नई व्यवस्था लागू की है.
अतिरिक्त प्रभार के लिए नए नियम
आदेश के अनुसार, यदि किसी विशेष परिस्थिति में कम समय के लिए सीनियर पद का प्रभार देना अनिवार्य होता है, तो इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेनी होगी. इसके बाद ही सेवा संहिता के नियम 103 के तहत अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकेगा.
इन मामलों से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा विवाद जल संसाधन विभाग के पूर्व अधिकारी बिंदेश्वर रविदास और एक अन्य कर्मी चंदा हेम्ब्रम के मामलों से जुड़ा था. बिंदेश्वर रविदास ने लंबे समय तक अधीक्षण और मुख्य अभियंता का प्रभार संभाला था, लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें कार्यपालक अभियंता के आधार पर पेंशन दी जा रही थी. हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर पद के वेतन का अंतर और उसी अनुसार पेंशन देने का आदेश दिया था, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है.