Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने ग्रामीण कार्य विभाग के कर्मचारी मोहन रजक को राहत देते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है. अदालत ने कहा कि विभागीय परीक्षा पास नहीं करने के आधार पर किसी कर्मचारी को पहले से मिले ACP और MACP के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता.
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने एकल पीठ के 19 दिसंबर 2024 के फैसले को सही ठहराया.
आर्थिक प्रगति की योजना है ACP और MACP
हाईकोर्ट ने कहा कि ACP यानी Assured Career Progression और MACP यानी Modified Assured Career Progression कर्मचारियों को लंबे समय तक पदोन्नति नहीं मिलने की स्थिति में आर्थिक लाभ देने के लिए बनाई गई योजनाएं हैं.
अदालत के अनुसार, इन लाभों को पदोन्नति नहीं माना जा सकता. इसलिए पदोन्नति के लिए लागू शर्तों को ACP और MACP पर लागू नहीं किया जा सकता.
1988 में जूनियर अकाउंट्स क्लर्क बने थे मोहन रजक
मामले के अनुसार, मोहन रजक की नियुक्ति 20 फरवरी 1988 को जूनियर अकाउंट्स क्लर्क के पद पर हुई थी. उन्होंने 1 मार्च 1988 को योगदान दिया था. उन्हें 1 मार्च 2000 से प्रथम ACP और 1 सितंबर 2008 से द्वितीय MACP का लाभ दिया गया था.
विभाग ने 2022 से मानी थी सेवा की पुष्टि
30 साल की सेवा पूरी होने के बाद मोहन रजक ने तृतीय MACP का लाभ देने की मांग की थी. विभाग ने कहा कि उन्होंने विभागीय लेखा परीक्षा का पांचवां पेपर 31 जुलाई 2022 को पास किया.
इसके बाद विभाग ने उनकी सेवा की पुष्टि 1 अगस्त 2022 से मानी. विभागीय आदेश में पहले ACP की तिथि 1 मार्च 2000 के बजाय 1 अगस्त 2022 कर दी गई थी. साथ ही द्वितीय MACP का लाभ भी वापस ले लिया गया था.
2018 के नियमों को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता
हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि संबंधित अवधि में ACP या MACP पाने के लिए विभागीय लेखा परीक्षा का पांचवां पेपर पास करना जरूरी था.
कोर्ट ने यह भी कहा कि 2018 के सेवा नियमों को पिछली तारीख से लागू कर कर्मचारियों को पहले से मिले लाभ वापस नहीं लिए जा सकते.
अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी के बाद में विभागीय परीक्षा पास करने पर उसकी सेवा की पुष्टि नियुक्ति की तिथि से मानी जाएगी, परीक्षा पास करने की तिथि से नहीं.
एकल पीठ का आदेश रहेगा लागू
इससे पहले एकल पीठ ने विभाग के दोनों आदेश रद्द कर दिए थे. एकल पीठ ने निर्देश दिया था कि मोहन रजक की सेवा 1 मार्च 1988 से ही पुष्टि मानी जाए.
अदालत ने प्रथम ACP और द्वितीय MACP का लाभ जारी रखने का भी निर्देश दिया था. साथ ही 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर मोहन रजक को तृतीय MACP का लाभ देने को कहा गया था.