Jamshedpur: बिष्टुपुर स्थित अपने आवास पर आयोजित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती समारोह में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं से देश की राजनीति, इतिहास और विभिन्न विचारधाराओं का गंभीर अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी दल से जुड़े कार्यकर्ता को केवल अपनी विचारधारा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश में क्या हो रहा है और विभिन्न राजनीतिक धाराओं का विकास कैसे हुआ, इसकी भी जानकारी रखनी चाहिए।
डॉ. मुखर्जी के योगदान को किया याद
सरयू राय ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले नेता थे, लेकिन जब भी देशहित में आवश्यकता पड़ी, उन्होंने अन्य विचारधाराओं के लोगों के साथ भी काम किया। उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था।
राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अध्ययन की जरूरत
उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कभी भी मुसलमानों के विरोधी नहीं थे। उनकी राजनीति का केंद्र केवल राष्ट्रहित था। वे अपने विचारों और नीतियों पर दृढ़ रहते थे, लेकिन देश के हित में हर सकारात्मक पहल का समर्थन करते थे। सरयू राय ने कहा कि राजनीति से जुड़े लोगों को वर्ष 1947 के बाद से देश में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे भारतीय राजनीति, विभिन्न दलों की विचारधाराओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि किसी एक विचारधारा में विश्वास रखने के बावजूद अन्य विचारधाराओं की जानकारी होना भी जरूरी है।
देश-दुनिया की घटनाओं पर रखें नजर
उन्होंने कहा कि एक जागरूक राजनीतिक कार्यकर्ता को देश के अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों और बदलावों की भी जानकारी होनी चाहिए। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में बार-बार एक जैसी सरकार बनने के पीछे क्या कारण हैं, इसे समझने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी जिज्ञासा ही एक राजनीतिक कार्यकर्ता को परिपक्व बनाती है।
आज की राजनीति में समन्वय जरूरी
सरयू राय ने कहा कि वर्तमान समय समावेशी और व्यावहारिक राजनीति का दौर है। केवल अपने सिद्धांतों पर अड़े रहने से राजनीति में आगे बढ़ना कठिन हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न विचारधाराओं को समझते हुए संवाद और समन्वय के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
सुबोध श्रीवास्तव ने भी रखे विचार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जदयू के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की एक महान राष्ट्रवादी विभूति थे। उन्होंने याद दिलाया कि नेहरू मंत्रिमंडल में मंत्री रहते हुए भी उन्होंने नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा कि "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे" का उनका नारा आज पूरी तरह साकार हो चुका है और जम्मू-कश्मीर भी देश के अन्य राज्यों की तरह भारतीय संविधान के अनुरूप संचालित हो रहा है। कार्यक्रम में प्रवीण सिंह, चुन्नू भूमिज और उषाय यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन कुलविंदर सिंह पन्नू ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विकास साहनी ने किया।