Jantar Mantar Protest: शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और लोकतांत्रिक संवाद को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है. JEE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के दौरान CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए. उन्होंने मिडिया से बातचीत में कहा कि देश के बड़े वैज्ञानिक, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन सरकार उनसे संवाद करने को तैयार नहीं दिख रही.
आखिर सरकार सोनम वांगचुक से बात क्यों नहीं कर रही?
प्रदर्शन के दौरान सबसे बड़ा सवाल लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को लेकर उठाया गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वांगचुक लगातार संविधान के दायरे में रहकर अपनी मांगें उठा रहे हैं, फिर भी केंद्र सरकार उनके साथ खुलकर बातचीत नहीं कर रही.
सोनम वांगचुक पिछले कई वर्षों से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत संरक्षण, स्थानीय लोगों के भूमि और रोजगार अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र को अधिक लोकतांत्रिक अधिकार देने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने इन मांगों को लेकर कई बार पदयात्रा, अनशन और शांतिपूर्ण आंदोलन किए.
क्या अब भी सरकार की नजर में "असहज" चेहरा हैं वांगचुक?
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और लद्दाख के संवेदनशील मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आवाज बना, क्या सरकार आज भी उससे संवाद करने से बच रही है? प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असहमति जताने वाले हर व्यक्ति को विरोधी मान लेना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है.
किसान आंदोलन जैसी दिख रही है तस्वीर
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा आंदोलन और किसान आंदोलन में कई समानताएं दिखाई दे रही हैं. दोनों आंदोलनों में शांतिपूर्ण धरना, लंबे समय तक प्रदर्शन, सरकार से बातचीत की मांग और विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन प्रमुख रहा है. इस बार भी किसानों के कई संगठनों ने शिक्षा और पारदर्शिता के मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया है. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद ही समाधान का सबसे प्रभावी रास्ता है.
जंतर-मंतर से कुछ ही दूरी पर सरकार
प्रदर्शनकारी यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जंतर-मंतर से केंद्रीय सचिवालय की दूरी कुछ किलोमीटर ही है, फिर भी सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधि प्रदर्शनकारियों से मिलने क्यों नहीं पहुंच रहे. उनका कहना है कि यदि बातचीत शुरू हो तो कई विवाद बिना टकराव के सुलझ सकते हैं.
क्या दोबारा परीक्षा ही समाधान है?
JEE समेत विभिन्न परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों के बीच प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल दोबारा परीक्षा कराना स्थायी समाधान नहीं है. उनकी मांग है कि पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों, माफिया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए.
क्या धर्मेंद्र प्रधान पर बढ़ेगा दबाव?
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी का मुद्दा प्रमुख है. हालांकि राजनीतिक रूप से उनके इस्तीफे की मांग नई नहीं है, लेकिन यह कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी कि CJP या अन्य संगठनों के आंदोलन से सरकार उन पर कोई कार्रवाई करेगी. इस संबंध में अंतिम फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भर करेगा.
यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं रह गया है. इसमें शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, युवाओं के भविष्य, लोकतांत्रिक संवाद और जवाबदेही जैसे बड़े सवाल शामिल हो चुके हैं. आने वाले दिनों में सरकार संवाद का रास्ता अपनाती है या टकराव का, इस पर सभी की नजर रहेगी.