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  • 2025-06-27

Seraikela Protest March: सरायकेला जेएलकेएम की पदयात्रा, सिविल सर्जन कार्यालय में सौंपा गया मांग पत्र

सरायकेला के गैरेज चौक से लेकर सिविल सर्जन कार्यालय तक झारखंड लोक कल्याण मंच (जेएलकेएम) द्वारा एक विरोध पदयात्रा निकाली गई। इस दौरान संगठन ने सिविल सर्जन को एक ज्ञापन सौंपते हुए गंभीर आरोपों के घिरे कर्मचारी कुलदीप कुमार घोषाल के स्थानांतरण की मांग दोहराई।

इस संदर्भ में संगठन के प्रतिनिधि नवीन महतो ने बताया कि हाल ही में एक महिला द्वारा न्याय की गुहार लगाए जाने के बाद संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया है। आरोप है कि कुलदीप घोषाल, जो वर्तमान में सिविल सर्जन कार्यालय, सरायकेला में प्रतिनियुक्त हैं, वर्ष 2017 में एक महिला चिकित्सक के साथ यौन उत्पीड़न और बलात्कार के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों में शामिल रहे हैं। इस मामले में पीड़िता द्वारा महिला थाना, सरायकेला में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद घोषाल को जेल भेजा गया था।

मामला वर्तमान में जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-1 के न्यायालय में विचाराधीन है और लगातार गवाही की प्रक्रिया चल रही है। जेएलकेएम का कहना है कि ऐसे मामलों में नियमानुसार आरोपी कर्मचारी को गवाही के दौरान स्थानांतरित किया जाना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। बावजूद इसके, कुलदीप घोषाल का स्थानांतरण अब तक नहीं किया गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि उन्हें संरक्षण प्रदान किया जा रहा है।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि घोषाल भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य मामलों में भी लिप्त हैं। उनके भाई रवींद्र घोषाल, जो सिविल सर्जन कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर थे, तीन जिलों में एक साथ नौकरी कर रहे थे। इस मामले में आमड़ापाड़ा थाना में मामला दर्ज होने के बाद रवींद्र घोषाल को जेल भेजा गया, और इसमें भी कुलदीप घोषाल की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

लोकसभा चुनाव के दौरान भी झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के आदेशानुसार कुलदीप घोषाल के स्थानांतरण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सिविल सर्जन द्वारा इन आदेशों की अनदेखी की गई। हाल ही में स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय द्वारा 11 दिसंबर 2024 को पुनः स्थानांतरण का स्पष्ट आदेश जारी किया गया, परन्तु उसका भी पालन नहीं हुआ।

जेएलकेएम ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर कुलदीप घोषाल का स्थानांतरण नहीं किया गया, तो संगठन बड़ा आंदोलन करेगा। इसको लेकर आज संगठन के कार्यकर्ताओं ने सिविल सर्जन कार्यालय तक पदयात्रा निकाली।

सिविल सर्जन ने इस विषय में कहा कि मामला 2017 का है और न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई चल रही है। मांग पत्र प्राप्त हुआ है, जिसपर विभागीय स्तर पर विचार किया जाएगा।


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