Ranchi News : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में सीटों में कटौती, आरक्षण नीति के पालन और छात्र हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सोमवार को छात्रों का आंदोलन उग्र हो गया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर और प्रशासनिक भवन के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ट्रेडिशनल और वोकेशनल स्नातक पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या में भारी कटौती कर दी है। उनका कहना है कि झारखंड के गरीब और मध्यमवर्गीय छात्र महंगे निजी संस्थानों में बीसीए, बीबीए, बीकॉम समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सरकारी विश्वविद्यालयों में सीटें कम होने से बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं।
आरक्षण नीति के पालन की मांग, कुलपति पर लगाए आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि हाल ही में जारी नामांकन सूची में राज्य सरकार की आरक्षण नीति का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि नामांकन प्रक्रिया को आरक्षण नियमों के अनुरूप दोबारा लागू किया जाए, ताकि सभी वर्गों के छात्रों को उनका अधिकार मिल सके।
छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लगातार ज्ञापन देने के बावजूद मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कुलपति को छात्रों के बीच आकर वार्ता करनी चाहिए थी, लेकिन कई सप्ताह तक केवल आश्वासन ही दिए गए। इसी के विरोध में छात्रों ने प्रशासनिक भवन के बाहर कुलपति का पुतला दहन किया और उनकी गाड़ी पर स्याही भी फेंकी।
लाठीचार्ज के बाद बढ़ा तनाव, अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द ही उनकी मांगों पर लिखित और समयबद्ध निर्णय नहीं लेता, तो विश्वविद्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना और आंदोलन जारी रहेगा।
छात्रों की प्रमुख मांगें:
• ट्रेडिशनल एवं वोकेशनल पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या पूर्ववत या बढ़ाई जाए।
• जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में लंबित शिक्षक नियुक्तियां की जाएं।
• एससी/एसटी छात्रों की फीस अनारक्षित वर्ग की तुलना में 50% कम की जाए।
• छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
• जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में विशेष कार्यशाला आयोजित की जाए।
• कॉमर्स और बीबीए विभाग में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति हो।
• एससी/एसटी रोस्टर और बैकलॉग पदों पर पारदर्शी भर्ती की जाए।
• आर्थिक रूप से कमजोर और एससी/एसटी छात्रों के लिए निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग शुरू की जाए।
• जनजातीय मुद्दों पर राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय स्तर के सेमिनार आयोजित किए जाएं।
• पीएचडी नियमावली तैयार कर आगामी एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पारित की जाए।