Faheem Khan Release: धनबाद के वासेपुर में चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड के दोषी फहीम खान की रिहाई का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट के रिहाई संबंधी आदेश को चुनौती दी गई थी. शीर्ष अदालत के फैसले के बाद अब कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर फहीम खान जेल से बाहर आ सकते हैं.
हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर
इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को सरकार को फहीम खान की रिहाई पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. अदालत ने माना था कि सरकार ने रिहाई पर विचार करते समय गलत नीति लागू की. हाईकोर्ट के अनुसार, फहीम के मामले में 2007 की संशोधित रिमिशन नीति नहीं, बल्कि सजा के समय प्रभावी 1984 की नीति लागू होनी चाहिए थी. इसी आधार पर अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दिया था.
राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. हालांकि सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की दलीलों से सहमति नहीं जताई और अपील खारिज कर दी. इसके साथ ही हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहा, जिससे फहीम खान की रिहाई का कानूनी रास्ता मजबूत हो गया है.
1989 के चर्चित हत्याकांड में हुई थी सजा
फहीम खान का नाम 1989 में वासेपुर के चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में सामने आया था. सत्र न्यायालय ने 1991 में उन्हें दोषी ठहराया था. बाद में 2009 में झारखंड हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसे 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. लंबे समय तक जेल में रहने, बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए उनकी रिहाई की मांग की गई थी.
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ फहीम खान तक सीमित नहीं है. इससे उन मामलों पर भी असर पड़ सकता है, जिनमें सजा के समय लागू रिमिशन नीति और बाद में बनी नई नीतियों को लेकर विवाद है. अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उसी नीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जो दोषसिद्धि के समय प्रभावी थी.
अब जेल प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अब जेल प्रशासन आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगा. औपचारिकताएं पूरी होने के बाद करीब 23 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके फहीम खान की रिहाई संभव मानी जा रही है.