Adityapur: आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित पम्मी धर्मकांटा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से लॉजिस्टिक कंटेनर चालक की मौत के बाद जियाडा (JIADA) प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा किया था, लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी कार्रवाई जमीन पर नजर नहीं आ रही है। घटना के बाद जियाडा की भूमिका और कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मौत के बाद जांच में सामने आया था अतिक्रमण का मामला
जानकारी के अनुसार, 30 मई को पम्मी धर्मकांटा के समीप हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से एक लॉजिस्टिक कंटेनर चालक की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद 1 जून को जियाडा की विशेष टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थल निरीक्षण और जमीन की नापी की थी। जांच के दौरान टीम ने पाया था कि धर्मकांटा के लिए आवंटित 4,350 वर्ग फुट जमीन के अतिरिक्त करीब 2,000 वर्ग फुट सरकारी नाले की जमीन पर कब्जा कर ब्लॉक बिछाए गए हैं।
नाले पर कब्जे से हादसे की आशंका जताई गई थी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी नाले पर अतिक्रमण कर जमीन का स्तर ऊंचा कर दिया गया था, जिसके कारण भारी वाहन हाईटेंशन लाइन के काफी करीब पहुंच रहे थे। लोगों का कहना है कि इसी वजह से दुर्घटना की स्थिति बनी। इस मामले में जियाडा के क्षेत्रीय उपनिदेशक दिनेश रंजन ने धर्मकांटा संचालक रवि सरावगी को 24 घंटे के अंदर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया था। उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर कानूनी कदम उठाने की बात भी कही थी। साथ ही यह भी बताया गया था कि पम्मी धर्मकांटा को पहले भी नोटिस दिया जा चुका है।
डेढ़ महीने बाद भी कार्रवाई नहीं, उठ रहे सवाल
जियाडा के अल्टीमेटम के बाद भी तय समय सीमा में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। अब स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जांच में अतिक्रमण चिन्हित किया गया था तो उसे हटाने की प्रक्रिया क्यों आगे नहीं बढ़ी। मामले पर जब क्षेत्रीय उपनिदेशक दिनेश रंजन से दोबारा जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि अब जांच में अतिक्रमण नहीं पाया गया है। अधिकारी के इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर पहले चिन्हित किया गया अतिक्रमण बाद में कैसे समाप्त हो गया।
मौके पर पार्किंग जारी, लोगों में नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में भी पम्मी धर्मकांटा के आसपास वाहनों की पार्किंग जारी है। उनका आरोप है कि हादसे के बाद सख्त कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन अब स्थिति पहले जैसी ही नजर आ रही है। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की दोबारा जांच कराई जाए और यदि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर पम्मी धर्मकांटा संचालक की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।