Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल स्थित सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना को बने चार दशक से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन परियोजना से प्रभावित 116 गांवों के विस्थापित आज भी पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। एक ओर सरकार डैम के पानी से हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर विस्थापितों का आरोप है कि उन्हें आज तक विस्थापन नीति के अनुरूप पूरा अधिकार नहीं मिला।
डैम से सरकार को मिला 717 करोड़ रुपये का राजस्व
जल संसाधन विभाग के अनुसार चांडिल डैम से पानी की आपूर्ति के एवज में अब तक सरकार को कुल 717 करोड़ 67 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसमें 583 करोड़ 54 लाख रुपये टाटा कंपनी द्वारा बकाया राशि के रूप में जमा किए गए हैं। विभाग के अनुसार वर्ष 2020-21 में 26.70 करोड़, 2021-22 में 29.76 करोड़, 2022-23 में 31.87 करोड़, 2023-24 में 120.03 करोड़ और 2024-25 में 127.20 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के अप्रैल महीने में ही 65.28 करोड़ रुपये जमा हुए हैं।
विस्थापितों का आरोप- मुआवजा और पुनर्वास अब तक अधूरा
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने आरोप लगाया कि 44 वर्ष बाद भी अधिकांश विस्थापितों को न पूरा मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि सरकार आरएल (Reduced Level) के नाम पर विस्थापन की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ा रही है, जबकि 2012 की पुनर्वास नीति में आरएल का कोई उल्लेख नहीं था। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान जलस्तर पर कई गांव पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रभावित हो चुके हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं नहीं मिली हैं। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये का राजस्व मिलने के बावजूद विस्थापितों के हित में राशि का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
"116 गांवों के बदले सिर्फ सात लोगों को बैठक में बुलाया जा रहा"
राकेश रंजन महतो ने कहा कि 24 जुलाई को प्रस्तावित बैठक में केवल सात विस्थापितों को बुलाया गया है, जबकि परियोजना से 116 गांव प्रभावित हैं। उन्होंने इसे विस्थापितों के साथ अन्याय बताते हुए सभी प्रभावित गांवों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
जल संसाधन विभाग का पक्ष- मुआवजा देकर ही बढ़ेगा जलस्तर
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चांडिल डैम के जलस्तर को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा रहा है। विभाग के अनुसार फिलहाल जलस्तर को आरएल-183 तक ले जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद अगले चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि सरकार ने आरएल 171-180, 180-183, 183-185 और 185-192 के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों का निर्धारण किया है। संबंधित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा देने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। विभाग का यह भी कहना है कि विस्थापितों के लिए स्वरोजगार योजनाओं का प्रावधान किया गया है। इच्छुक लोगों को मत्स्य पालन समेत अन्य रोजगारों के लिए प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यपालक अभियंता बोले- डैम का रखरखाव पहले से बेहतर
सुवर्णरेखा परियोजना के कार्यपालक अभियंता संजय सिंह ने बताया कि डैम के रखरखाव और संचालन में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सभी 13 रेडियल गेट और चार स्लुइस गेट पूरी तरह संचालित हैं। डैम का संचालन अब SCADA सिस्टम के साथ-साथ मैकेनिकल और मैनुअल तीनों माध्यमों से किया जा रहा है, जिससे जलस्तर और डिस्चार्ज की लगातार निगरानी संभव हो रही है।
चुनावी मुद्दा बना विस्थापन, समाधान का इंतजार जारी
चांडिल डैम विस्थापन का मुद्दा हर चुनाव में प्रमुखता से उठता रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। करोड़ों रुपये के राजस्व और वर्षों पुराने वादों के बीच विस्थापित आज भी मुआवजा, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं।