JPSC Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब पूर्व आयोग अध्यक्ष तक पहुंच गई है. गुरुवार को अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की टीम ने JPSC के निवर्तमान अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते के कांके रोड स्थित आवास पर छापेमारी की. यह कार्रवाई करीब पांच घंटे तक चली, जिसमें जांच अधिकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया और आयोग के कामकाज से जुड़े कई दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की.
हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या डिजिटल सामग्री जब्त की गई है, इसे लेकर CID की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है. एजेंसी ने फिलहाल जांच की गोपनीयता बनाए रखी है.
एफआईआर के बाद लगातार बढ़ रहा जांच का दायरा
14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित धांधली की शिकायतों के बाद CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू की थी. इसके बाद से आयोग के अधिकारियों, परीक्षा संचालन से जुड़े कर्मचारियों और निजी एजेंसियों की भूमिका की लगातार पड़ताल की जा रही है.
अब तक इस मामले में पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के अधिकारी भी शामिल हैं. जांच एजेंसी का मानना है कि पूरे मामले में कई स्तरों पर तथ्यों की जांच अभी बाकी है.
छापेमारी के बाद दिया था इस्तीफा
JPSC कार्यालय में CID की कार्रवाई के बाद एल. ख्यांग्ते ने मंगलवार देर शाम अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके अगले दिन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इसके बाद से आयोग की कार्यप्रणाली और परीक्षा संचालन को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं.
9 परीक्षाएं पहले ही हो चुकी हैं स्थगित
जांच के बीच JPSC ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा सहित कुल नौ प्रतियोगी परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है. आयोग ने इसे "अपरिहार्य कारणों" से लिया गया निर्णय बताया है.
प्रश्नपत्र से लेकर परीक्षा केंद्र तक होगी जांच
सूत्रों के अनुसार, CID अब केवल परीक्षा परिणाम या चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं है. एजेंसी प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया, प्रिंटिंग प्रेस के चयन, गोपनीय सामग्री की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों के आवंटन और आउटसोर्सिंग एजेंसियों की भूमिका की भी विस्तार से जांच कर रही है.
बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में आयोग के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और परीक्षा से जुड़ी निजी एजेंसियों के प्रतिनिधियों से भी पूछताछ की जा सकती है. जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क और प्रशासनिक निर्णयों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है.