Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की सूचना सार्वजनिक होने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपना वक्तव्य दिया. उन्होंने पद छोड़ने के निर्णय का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि संगठन की अन्य मुख्य मांगें अभी भी अधूरी हैं. जब तक उन सभी मांगों पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक इस आंदोलन को पूर्ण रूप से समाप्त नहीं समझा जाएगा.
अभिजीत दीपके ने कहा कि शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना उनकी प्राथमिकता सूची में पहली मांग थी, किंतु कई महत्वपूर्ण विषय अब भी शेष हैं. उन्होंने मांग उठाई कि पेपर लीक विवाद से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रूपए का हरजाना दिया जाए. इसके अतिरिक्त आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों पर दर्ज मुकदमों को निरस्त किया जाए और पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जिम्मेदारी तय हो.
सोशल मीडिया पर CJP ने साझा की अपनी लंबित मांगों की सूची
सोशल मीडिया पर जारी संदेश में CJP ने अपनी प्रमुख मांगों की स्थिति साझा की.
संगठन के अनुसार
- शिक्षा मंत्री का त्यागपत्र- स्वीकृत
- मृतक विद्यार्थियों के परिवारों को 1 करोड़ रूपए का मुआवजा- लंबित
- प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई न होना- लंबित
- दिल्ली पुलिस एवं आरएएफ (RAF) द्वारा सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना- लंबित.
अभिजीत दीपके का बयान और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
अभिजीत दीपके ने कहा कि यह संपूर्ण घटनाक्रम जनतांत्रिक आंदोलन की शक्ति को निरूपित करता है. यदि नागरिक शांतिपूर्ण मार्ग पर अडिग रहें, तो लोकतांत्रिक तंत्र में जवाबदेही निर्धारित की जा सकती है. उन्होंने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई और छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग की.
इससे पूर्व देशव्यापी विरोध के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को दो पन्नों की चिट्ठी भेजकर इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे से पहले पोस्ट कर उन्होंने लिखा कि बीते 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन व्यथित है, यह उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं है और वे भारत की युवा शक्ति को किसी कुचक्र में फंसने नहीं देंगे.