Jharkhand Wildlife Corridor: झारखंड सरकार ने जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए एक व्यापक योजना बनाई है. “स्ट्रेटेजी एंड एक्शन प्लान फॉर कंजरवेशन ऑफ कॉरिडोर" के तहत पूरे राज्य में 75 वन्यजीव कॉरिडोर चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 14 को बहुत ही संवेदनशील माना गया है. सरकार का मुख्य उद्देश्य हाथियों, बाघों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को सुरक्षित बनाना है और जंगलों पर बढ़ते मानवीय दबाव को कम करना है.
75 कॉरिडोर में फैला है राज्य का बड़ा वन क्षेत्र
इन 75 कॉरिडोर में झारखंड का एक बड़ा वन क्षेत्र फैला हुआ है. योजना के अनुसार, इन सभी कॉरिडोर का कुल क्षेत्रफल 10,715.63 वर्ग किलोमीटर है, जो झारखंड के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 13.45 प्रतिशत और राज्य के कुल वन क्षेत्र का लगभग 45.4 प्रतिशत हिस्सा है. इनमें से 14 कॉरिडोर को सबसे अधिक संवेदनशील माना गया है, जिनका संयुक्त क्षेत्रफल 3,111.24 वर्ग किलोमीटर है.
पहला चरण: कॉरिडोर की पहचान और मैपिंग
वन विभाग ने इस योजना को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया है. पहला चरण है कॉरिडोर की पहचान और मैपिंग. इसमें झारखंड के जंगलों में वन्यजीवों के आवाजाही मार्गों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान की गई है. दूसरा चरण है संरक्षण और कार्ययोजना, जिसमें प्रत्येक कॉरिडोर के लिए अलग यूनिक स्टेट आईडी निर्धारित की गई है ताकि संबंधित वन प्रमंडलों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और संरक्षण संबंधी कार्यों की प्राथमिकता तय करने में आसानी हो.
दूसरा चरण: संरक्षण और कार्ययोजना
वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने के लिए, प्रत्येक कॉरिडोर को तीन प्रबंधन क्षेत्रों में बांटा गया है. पहला है इंटेंसिव मैनेजमेंट ज़ोन, जहां सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण के विशेष उपाय किए जाएंगे. दूसरा है मॉडरेट मैनेजमेंट जोन, जहां नियमित निगरानी और नियंत्रित हस्तक्षेप किया जाएगा. तीसरा है लो मैनेजमेंट ज़ोन, जहां आवश्यकता के अनुसार सीमित संरक्षण गतिविधियां संचालित होंगी.
सरकार का मानना है कि इस योजना से हाथियों, बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, जंगलों की जैव विविधता बचाने और भविष्य की संरक्षण योजनाओं को वैज्ञानिक आधार देने में भी यह मास्टरप्लान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.