Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले चालक के परिवार को बड़ी राहत देते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), तेनुघाट द्वारा तय 1.87 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 5.85 लाख रुपये कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक की अदालत ने यह आदेश मृतक चालक बिजली रविदास की पत्नी वीणा देवी और उनके बच्चों की अपील पर सुनवाई के बाद दिया।
मृतक के परिजनों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। उनकी ओर से अधिवक्ता हर्ष चंद्र और अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एमएसीटी ने मृतक की वार्षिक आय मात्र 15 हजार रुपये मानी थी, जबकि दावा किया गया था कि वह चालक के रूप में हर महीने 4 हजार रुपये कमाता था।
दस्तावेज नहीं होने पर भी माना आय का दावा
हाई कोर्ट ने कहा कि केवल आय का दस्तावेजी प्रमाण नहीं होने के आधार पर दावा पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने मृतक की मासिक आय 2 हजार रुपये और वार्षिक आय 24 हजार रुपये निर्धारित की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित मानकों के अनुसार 40 प्रतिशत भविष्यगत आय जोड़ते हुए, व्यक्तिगत खर्च की कटौती और 17 के मल्टीप्लायर के आधार पर आश्रितों की आय हानि 4.35 लाख रुपये से अधिक आंकी।
5.85 लाख रुपये मुआवजा, 6 प्रतिशत ब्याज भी मिलेगा
अदालत ने 15 हजार रुपये संपत्ति हानि, 15 हजार रुपये अंतिम संस्कार खर्च तथा तीनों दावेदारों को 40-40 हजार रुपये कंसोर्टियम के रूप में देने का भी आदेश दिया। इस तरह कुल मुआवजा 5 लाख 85 हजार 200 रुपये निर्धारित किया गया।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस राशि पर दावा याचिका दाखिल होने की तिथि से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा। साथ ही नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को छह सप्ताह के भीतर बढ़ी हुई मुआवजा राशि जमा करने का आदेश दिया गया है। पहले से किए गए भुगतान को अंतिम राशि में समायोजित किया जाएगा।