Coal Block Allocation Case: कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी है. शीर्ष अदालत ने वर्ष 2015 में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी समन और संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद नहीं था.
विशेष अदालत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने किया निरस्त
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से दायर अपील स्वीकार करते हुए कहा कि विशेष सीबीआई अदालत का वर्ष 2015 का आदेश कानून के अनुरूप नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई उचित नहीं बनती.
सीबीआई को नहीं मिले थे पर्याप्त साक्ष्य
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो इस मामले में दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुका था. जांच एजेंसी का कहना था कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ अभियोजन चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. इसके बावजूद विशेष सीबीआई अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार करते हुए उन्हें समन जारी किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. इससे पहले 1 अप्रैल 2025 को शीर्ष अदालत इस समन पर अंतरिम रोक भी लगा चुकी थी. उस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि कोयला ब्लॉक आवंटन का फैसला प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया था और स्क्रीनिंग समिति की सिफारिश से अलग निर्णय लेना उस समय किसी कानून का उल्लंघन नहीं माना जा सकता था.
मामले की कानूनी प्रक्रिया पर लगा पूर्ण विराम
यह निर्णय डॉ. मनमोहन सिंह के 26 दिसंबर 2024 को हुए निधन के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बाद आया है. सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अदालत से विशेष अदालत की प्रतिकूल टिप्पणियां भी हटाने का अनुरोध किया था. आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अपील मंजूर करते हुए विशेष अदालत का आदेश रद्द कर दिया और सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर मामले में डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ी पूरी कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी.