Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा ने बुधवार को चर्चा के बाद पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया. इसके बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के एक बयान पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि बच्चों को मूर्ख कहना गलत है. साथ ही उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को FOMO हो गया हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नहीं बन पाने की वजह से राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान कोई गोली नहीं चली थी, केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के शब्द अनुचित हैं और उनमें अनुभव का अभाव दिखाई देता है. साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि गोली चलाने का आदेश गृह मंत्री नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट देते हैं.
विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है. उन्होंने कहा, “विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है."
जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को मूर्ख कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा, “इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, मूर्ख कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है."
21 जुलाई की घटना का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, “21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास के बाहर जाकर बैठ गए. ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और प्रधानमंत्री आवास में बैठाए. जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए."
इसी दौरान सदन में उठाए गए एक अन्य मुद्दे पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जिस घटना का उल्लेख किया जा रहा है, उसमें गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था. जितेंद्र सिंह ने कहा, “बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली. जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता. इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है."